
अलीगढ़ 17 अप्रैल । आधुनिक युग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बढ़ती पैठ ने जहां विकास के नए द्वार खोले हैं, वहीं शासन व्यवस्था और सार्वजनिक नीतियों के समक्ष नई चुनौतियां भी पेश की हैं। इन्हीं महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा के लिए मंगलायतन विश्वविद्यालय के कंप्यूटर इंजीनियरिंग एंड एप्लीकेशन विभाग द्वारा “चैलेंज ऑफ पब्लिक पॉलिसी एंड गवर्नेंस इन द एज ऑफ एआई” विषय पर एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक रूप से दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ भेंट कर किया गया। कुलसचिव ब्रिगेडियर डा. समरवीर सिंह ने अतिथियों का परिचय कराते हुए वर्तमान परिप्रेक्ष्य में इस विषय की प्रासंगिकता पर बल दिया। डीन एकेडमिक प्रो. अम्बरीष शर्मा ने सेमिनार के मूल विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एआई के इस युग में सार्वजनिक नीतियों को अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी और तकनीक-संगत बनाने की तत्काल आवश्यकता है।
मुख्य अतिथि सेवानिवृत्त आईएएस जीपी उपाध्याय ने प्रशासनिक अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि वर्तमान व्यवस्था में एआई का समावेश सुशासन की दिशा में एक बड़ा क्रांतिकारी कदम हो सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा तकनीक का सही उपयोग ही सुशासन की असली कुंजी है, लेकिन इसके लिए नीति-निर्माताओं और प्रशासकों को तकनीक के साथ-साथ नैतिक मूल्यों के प्रति भी सजग रहना होगा। वहीं, विशिष्ठ अतिथि इजली एआई के संस्थापक प्रसून चौधरी ने एआई के व्यावहारिक पहलुओं पर तकनीकी जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि किस प्रकार एआई जटिल प्रक्रियाओं को सरल और अधिक प्रभावी बना सकता है। हालांकि, उन्होंने आगाह किया कि डेटा सुरक्षा, गोपनीयता और एआई की नैतिकता जैसे मुद्दों पर गंभीरता से विचार करना अनिवार्य है, ताकि इसके सामाजिक प्रभावों को संतुलित रखा जा सके।
सेमिनार के दौरान आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र में विद्यार्थियों ने एआई के भविष्य और इसके रोजगार पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर कई सवाल पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने विस्तार से जवाब दिया। दोपहर बाद एक विशेष वर्कशाॅप का भी आयोजन किया गया। जिसमें छात्रों को एआई की आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। प्रो. राजीव शर्मा ने सभी का आभार व्यक्त किया। विभागाध्यक्ष डा. लव मित्तल ने कार्यक्रम के सफल आयोजन पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय अपने छात्रों को भविष्य की तकनीकों के लिए तैयार करने हेतु प्रतिबद्ध है। अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का विधिवत समापन हुआ। कार्यक्रम में समन्वयक डा. मनोज वार्ष्णेय, ललित किशोर, सत्यनारायण की भूमिका रही। इस अवसर पर संकाय सदस्य और विद्यार्थी उपस्थित रहे। संचालन डा. दीपिका बांदिल ने किया।


























