
मथुरा 17 अप्रैल । केडी विश्वविद्यालय में नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर इस समय गजब का उत्साह है। नारी शक्ति का सम्मान, देश का अभिमान मूलमंत्र को प्रगाढ़ता देने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय द्वारा तीन दिवसीय विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है। गुरुवार को नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में महिला शिक्षकों तथा मेडिकल और नर्सिंग छात्राओं ने नारी शक्ति पदयात्रा निकाली। इतना ही नहीं हस्ताक्षर अभियान चलाकर तथा मानव श्रृंखला बनाकर नारी सशक्तीकरण का संदेश दिया।
नारी शक्ति पदयात्रा के बाद महिला आरक्षण पर परिचर्चा हुई जिसमें डॉ. विनीता गुप्ता, डॉ. नवप्रीत कौर, डॉ. गगनदीप कौर ने अपने-अपने विचार साझा किए। सभी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम (2023) को भारत में महिलाओं के राजनीतिक सशक्तीकरण की दिशा में मील का पत्थर निरूपित किया। डॉ. विनीता गुप्ता पूर्व डीन सेंटर फॉर मीडिया, रिसर्च एण्ड पब्लिकेशंस, महाराजा अग्रसेन इंस्टीट्यूट आफ मैनेजमेंट स्टडीज, आईपी यूनिवर्सिटी दिल्ली ने कहा कि यह ऐसा ऐतिहासिक कदम है, जो लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण सुनिश्चित करेगा। डॉ. नवप्रीत कौर डीन और प्राचार्या केडी डेंटल कॉलेज ने कहा कि यह कानून केवल प्रतिनिधित्व नहीं बल्कि नीति-निर्माण में भागीदारी बढ़ाकर महिलाओं को निर्णय लेने की प्रक्रिया में सशक्त बनाएगा, जिससे समावेशी विकास और महिला नेतृत्व विकास को बढ़ावा मिलेगा।
कुलपति डॉ. मनेश लाहौरी, प्रति-कुलपति डॉ. गौरव सिंह, कुलसचिव डॉ. विकास कुमार अग्रवाल तथा डीन और प्राचार्य केडी मेडिकल कॉलेज डॉ. आर.के. अशोका ने भी नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर अपने-अपने विचार साझा किए। कुलपति डॉ. मनेश लाहौरी ने कहा कि यह कानून निर्णय लेने की प्रक्रिया में महिलाओं की प्रत्यक्ष भागीदारी को सुनिश्चित कर उन्हें ‘स्वतंत्र’ और ‘सशक्त’ बनाएगा। अब महिलाएं पंचायत से लेकर संसद तक नीति निर्धारण में अपनी भूमिका का निर्वहन कर सकेंगी जिससे समाज की अंतिम पंक्ति की महिला को लाभ मिलेगा। प्रति-कुलपति डॉ. गौरव सिंह ने कहा कि महिलाओं ने अपनी बुद्धिमत्ता और क्षमता के बल पर हर मुकाम हासिल किया है। उनके अधिकारों की रक्षा करना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि महिलाओं का उत्थान समाज और राष्ट्र के उत्थान का मार्ग प्रशस्त करता है।
कुलसचिव डॉ. विकास कुमार अग्रवाल ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को महिला सशक्तीकरण की दिशा में एक अभूतपूर्व ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने अधिनियम की बारीकियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संसद में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने वाले इस कानून से न केवल नारी शक्ति का नेतृत्व सुदृढ़ होगा बल्कि विधायी और संसदीय कार्यक्षेत्र में उनकी भागीदारी भी प्रभावी ढंग से बढ़ेगी।
कुलसचिव डॉ. अग्रवाल ने कहा कि केडी विश्वविद्यालय सदैव छात्राओं की शिक्षा, सुरक्षा और उनके सर्वांगीण विकास को प्रतिबद्ध है। विश्वविद्यालय इस ऐतिहासिक अधिनियम की भावना को आत्मसात करते हुए कैम्पस में एक ऐसा समावेशी वातावरण बनाने का प्रयास कर रहा है, जहां हर छात्रा निडर होकर अपनी मेधा और कौशल का प्रदर्शन कर सके। डॉ. आर.के. अशोका ने कहा कि हम सभी को इस अधिनियम के महत्व को समझ कर लैंगिक समानता पर जोर देना चाहिए तथा ऐसे विकसित भारत का निर्माण करना चाहिए जहां नारी शक्ति न केवल राष्ट्र निर्माण की धुरी हो बल्कि भविष्य की दिशा तय करने वाली मार्गदर्शक भी बने।


























