
नई दिल्ली 01 सितम्बर। नीट-यूजी पेपर लीक के खिलाफ हुए प्रदर्शनों में शामिल छात्रों को सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बड़ी राहत दी है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने विशेष संवैधानिक अधिकार अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल करते हुए दिल्ली समेत चार राज्यों में प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने का आदेश दिया है। अदालत के इस फैसले के बाद छात्रों के खिलाफ दर्ज इन मामलों में बड़ी राहत मिली है। वहीं, केंद्र सरकार की ओर से प्रदर्शन के दौरान आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा दिए जाने का भरोसा भी अदालत के समक्ष दोहराया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के अलावा असम, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और बिहार में नीट प्रदर्शन से जुड़े मामलों में दर्ज एफआईआर को रद्द करने का आदेश दिया है। ये मामले मुख्य रूप से 20 से 25 जुलाई के बीच हुए प्रदर्शनों से संबंधित बताए गए हैं। दिल्ली पुलिस और संबंधित चार राज्य सरकारों की ओर से भी अदालत के समक्ष अनुच्छेद 142 के तहत इन मामलों को समाप्त करने की मांग की गई थी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज इन एफआईआर को समाप्त करने का निर्देश दिया।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सरकार प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत के दौरान दिए गए भरोसे पर कायम है। उन्होंने कहा कि नीट प्रदर्शन के दौरान आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। केंद्र सरकार ने मुआवजे की व्यवस्था और उसके तौर-तरीके तय करने के लिए करीब तीन महीने का समय मांगा है। इसके लिए अलग-अलग राज्य सरकारों और संबंधित पक्षों के साथ विचार-विमर्श किए जाने की बात कही गई है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शन से संबंधित एफआईआर को रद्द करने का आदेश दिया है, लेकिन मामले में 2873 ऐसे लोगों के खिलाफ नई एफआईआर दर्ज करने की अनुमति भी दी गई है, जिनके बारे में सरकार की ओर से आपराधिक इतिहास होने की बात कही गई है। अदालत के सामने सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि इन लोगों का आपराधिक रिकॉर्ड बताया गया है और इसी आधार पर उनके खिलाफ अलग से कार्रवाई की आवश्यकता है। सुनवाई के दौरान अधिवक्ता हरिहरन ने इन 2873 लोगों की सूची उपलब्ध कराने की मांग की, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किन लोगों के खिलाफ आपराधिक रिकॉर्ड के आधार पर आगे कार्रवाई प्रस्तावित है। ऐसे में प्रदर्शनकारी छात्रों को मिली राहत के बावजूद इन 2873 लोगों पर कार्रवाई का मामला अलग बना हुआ है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले और केंद्र सरकार के सकारात्मक रुख के बाद सीजेपी ने पांच सितंबर को प्रस्तावित मार्च वापस लेने का फैसला किया है। सुनवाई के दौरान सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने अदालत को इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार की ओर से दिए गए भरोसे और सुप्रीम कोर्ट के आदेश को देखते हुए संगठन ने प्रस्तावित मार्च को वापस लेने का निर्णय लिया है। अदालत ने सौरव दास के बयान को अपने आदेश में दर्ज किया। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों के बीच बातचीत को लेकर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि यदि दोनों पक्ष खुले मन से बातचीत करें और एक-दूसरे पर भरोसा रखें तो कठिन से कठिन मुद्दे का समाधान बातचीत के माध्यम से निकाला जा सकता है। इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई बातचीत सकारात्मक और रचनात्मक रही है। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों पक्ष एक-दूसरे के दुश्मन नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद नीट-यूजी पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्रों के लिए बड़ी राहत की स्थिति बनी है। दिल्ली और चार राज्यों में प्रदर्शन से संबंधित एफआईआर समाप्त होने से उन छात्रों को कानूनी कार्रवाई से राहत मिलेगी, जो इन प्रदर्शनों में शामिल हुए थे। हालांकि, आपराधिक इतिहास वाले बताए जा रहे 2873 लोगों के खिलाफ संभावित नई कार्रवाई और उनकी सूची को लेकर मामला अभी चर्चा में है। वहीं, प्रदर्शन के दौरान जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने के केंद्र के भरोसे पर भी अब आगे की प्रक्रिया का इंतजार रहेगा।











