
हाथरस 01 सितम्बर। आशु कवि अनिल बौहरे के 75वें अमृत जन्मोत्सव के अवसर पर वन्देमातरम कवि सम्मेलन श्रृंखला का तीसरा कवि सम्मेलन काका हाथरसी स्मारक भवन में उत्साह और उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में साहित्य, संस्कृति और राष्ट्रप्रेम का अनूठा संगम देखने को मिला। कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से श्रोताओं को भाव-विभोर करने के साथ-साथ हास्य और व्यंग्य से खूब गुदगुदाया। कार्यक्रम की अध्यक्षता हास्य कवि सबरस मुरसानी ने की, जबकि मुख्य अतिथियों के रूप में चेयरमैन देशराज सिंह, डॉली माहौर तथा सत्यपाल सिंह मदनावत मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान आशु कवि अनिल बौहरे ने अपने 75वें अमृत जन्मोत्सव के अवसर पर प्रकाशित पुस्तकों ‘बधाई है बधाई’ तथा ‘शुभकामनाएं’ का उल्लेख करते हुए कहा कि जन्मदिवस जैसे अवसरों पर इन शब्दों के प्रयोग से आपसी स्नेह और आत्मीयता बढ़ेगी, जिससे समाज के सशक्तीकरण को भी बल मिलेगा। उन्होंने कहा कि साहित्य और शुभकामनाओं की संस्कृति समाज में सकारात्मक भावनाओं को मजबूत करने का कार्य करती है।
समारोह में आशु कवि अनिल बौहरे के सहयोगी रहे दिवंगत गणमान्य व्यक्तित्वों डा. श्रीमोहन प्रदीप, मदनलाल काका, कैलाश बूटिया, जगदीश लाल सलूजा, श्रीमती पुष्पालता शर्मा फौजी, पं. चन्द्रदेव बैदेल, हरीश शर्मा और मदनलाल वार्ष्णेय के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को श्रद्धापूर्वक याद किया गया। कार्यक्रम अध्यक्ष एवं अतिथियों द्वारा दिवंगत विभूतियों के छायाचित्रों पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। वक्ताओं ने विभिन्न क्षेत्रों में उनके योगदान को याद करते हुए उनके निधन को समाज और साहित्य जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताया। इस अवसर पर उनकी स्मृति में चेयरमैन देशराज सिंह, हास्य कवि सबरस मुरसानी, डॉ. बंगाली सिंह, पूर्व सांसद, पप्पन पहलवान, विजय सिंह प्रेमी, बासुदेव माहौर, सुरेश अग्रवाल एवं अतुल चौधरी को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में ‘वन्देमातरम’ गीत के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में विशेष काव्य पाठ भी आयोजित किया गया। इस दौरान कवि सबरस मुरसानी, श्यामबाबू चिंतन, डॉ. उपेन्द्र झा, प्रभु दयाल प्रभु, पंडित हाथरसी, महेश पागल, हरिओम उपाध्याय और दीपक रफी ने अपनी-अपनी रचनाओं का काव्य पाठ कर राष्ट्रप्रेम की भावना से ओतप्रोत वातावरण बना दिया। कवियों की प्रस्तुतियों पर श्रोताओं ने तालियों के साथ उत्साहवर्धन किया। कवि सम्मेलन में शहर के साहित्यप्रेमी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में मौजूद रहे। इनमें अखिलेश गुप्ता, मनोज बूटिया, कन्हैया लाल तेल वाले, सत्यप्रकाश रंगीला, राजकुमार कोठीवाल, श्रीराम वार्ष्णेय, कृष्णा पहलवान, अचल बूटिया, बाल कवि विष्णु, गम्भीर सिंह, चौधरी जयवीर सिंह, लक्ष्मण सिंह और राघवेन्द्र बैदेल सहित अनेक लोग शामिल रहे। कार्यक्रम की व्यवस्थाओं में ग़ाफ़िल स्वामी, जीवनलाल शर्मा, सोनाली वार्ष्णेय, पूरन सागर, राधा कर्ण, लक्ष्मण सिंह और सूरजपाल सिंह ने सहयोग किया। कार्यक्रम का संचालन स्वयं आशु कवि अनिल बौहरे ने किया।












