
हाथरस 24 अप्रैल । उत्तर प्रदेश गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता एवं सदस्य रमाकांत उपाध्याय ने जनपद हाथरस के विभिन्न गौ आश्रय स्थलों का सघन निरीक्षण किया। इस दौरान टीम ने न केवल व्यवस्थाओं को परखा, बल्कि गौवंश आधारित प्राकृतिक खेती और ग्रामीण स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश भी जारी किए। निरीक्षण दल ने जनपद के अस्थाई गौ आश्रय स्थल कैलोरा व समामई रूहल और बृहद गौ संरक्षण केंद्र पुन्नेर का स्थलीय निरीक्षण किया। इसके बाद विकास भवन में आयोजित समीक्षा बैठक में मुख्य विकास अधिकारी पी.एन. दीक्षित और मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. विजय सिंह सहित अन्य अधिकारियों के साथ गौ संरक्षण एवं गौ संवर्धन को धरातल पर प्रभावी बनाने हेतु रणनीति तैयार की गई। टीम ने परसारा निवासी उन्नतशील कृषक बृजेश सिंह के फार्म का भ्रमण कर प्राकृतिक खेती के मॉडल को भी देखा।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए ‘गौ मॉडल’
निरीक्षण दल ने रेखांकित किया कि गौशालाओं को केवल पशुपालन तक सीमित न रखकर उन्हें ग्रामीण अर्थव्यवस्था के केंद्र के रूप में विकसित किया जाए। गोबर और गोमूत्र के माध्यम से जैविक खाद, बायोपेस्टिसाइड, जीवामृत, गो-काष्ठ, धूप और मूर्तियाँ बनाने हेतु स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और युवाओं को जोड़ा जाएगा। इससे न केवल गांवों में रोजगार सृजित होगा, बल्कि रासायनिक मुक्त खेती से जनस्वास्थ्य में भी सुधार होगा। निरीक्षण और बैठक के दौरान खंड विकास अधिकारी हाथरस व सासनी, प्रांतीय गौपालक प्रमुख सुशील पचौरी, गौसेवक अंशुल शर्मा, दिव्यांश शर्मा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और प्रगतिशील पशुपालक उपस्थित रहे। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वर्ष 2024 के शासनादेश के अनुसार गौशालाओं के प्रबंधन में स्वयंसेवी संस्थाओं (NGOs) और किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) की भागीदारी सुनिश्चित की जाए।


























