
अलीगढ़ 29 अप्रैल । शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता सुधार और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी 2020) के उद्देश्यों को धरातल पर उतारने के लिए मंगलायतन विश्वविद्यालय में विशेष पहल की जा रही है। इसी कड़ी में इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग और आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) के संयुक्त तत्वावधान में संवादात्मक सत्र का आयोजन किया गया। जिसमें “डिजाइनिंग इफेक्टिव करिकुलम: एम्फेसाइजिंग आउटकम-बेस्ड एजुकेशन एंड इम्प्लीमेंटेशन” विषय पर चर्चा हुई। इस सत्र में मुख्य वक्ता शिक्षा विशेषज्ञ डा. नमेष मिगलानी ने पाठ्यक्रम डिजाइन करने के आधुनिक तरीकों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा केवल ज्ञान देने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसके परिणाम स्पष्ट और मापने योग्य होने चाहिए। कोर्स आउटकम, प्रोग्राम आउटकम और प्रोग्राम स्पेसिफिक आउटकम को स्पष्ट रूप से परिभाषित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया। डा. मिगलानी ने बताया कि शिक्षण रणनीतियों और मूल्यांकन विधियों के बीच तालमेल होना अनिवार्य है ताकि विद्यार्थियों के प्रदर्शन का पारदर्शी और वस्तुनिष्ठ तरीके से आकलन किया जा सके। प्रो. राजीव शर्मा ने विश्वविद्यालय द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति और राष्ट्रीय क्रेडिट ढांचा के तहत की जा रही विभिन्न पहलों से सदन को अवगत कराया। वहीं, प्रो. अब्दुल वदूद सिद्दीकी ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा पाठ्यक्रमों को संशोधित किया जा रहा है। इस संवाद सत्र में शिक्षकों ने विद्यार्थियों के असेसमेंट करने पर भी गहन चर्चा की। आईक्यूएसी डायरेक्टर प्रो. राजेश उपाध्याय ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के आयोजन पर संयुक्त कुलसचिव प्रो. दिनेश शर्मा ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे समय की आवश्यकता बताया। सत्र के दौरान डीन एकेडमिक प्रो. अम्बरीष शर्मा, प्रो. दिनेश पांडेय, प्रो. अनुराग शाक्य, प्रो. सिद्धार्थ जैन, प्रो. जितेंद्र सिंह, प्रो. अशोक उपाध्याय, डा. सोनी सिंह, डा. लव मित्तल, डा. पूनम रानी आदि ने भी अपने विचार साझा किए।
























