हम हैं शीशे से टूट जाएंगे,
तुम न आये तो रूठ जाएंगे,
कोशिशें कामयाब होती है-
वादे जितने हैं टूट जाएंगे।

मेरे सांचे में ढल के देख ज़रा,
दो क़दम साथ चल के देख ज़रा,
मेरे प्रोमिज का रंग पक्का है-
अपने गालों पे मल के देख ज़रा।

रचनाकार-कवि विष्णु सक्सेना