बुझ न पाए वो प्यास मत देना,
कोई लम्हा उदास मत देना,
घोल दे ज़िंदगी मे कड़वाहट-
ऐसी मुझको मिठास मत देना।

द्वार जब दिल के खोल देती हो,
सच मे मिश्री सी घोल देती हो,
मुझको मिल जाती चॉकलेट तभी-
जब भी मीठा सा बोल देती हो।
“विष्णु सक्स्सेना”