हाथरस 21 सितम्बर। ऐतिहासिक मेला श्री दाऊजी महाराज के विशाल पंडाल स्थित मंच पर रविवार, 21 सितंबर की प्रातःकाल बेला में हाथरस की माटी में जन्मे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, क्रांतिकारी, पत्रकार, समाज सुधारक एवं दानवीर राजा महेंद्र प्रताप सिंह और उनके पूर्वज राजा दयाराम सिंह की स्मृति में विचार संगोष्ठी एवं सेमिनार का आयोजन किया गया। दाऊजी महाराज मेले के 115 वर्षों के इतिहास में पहली बार राजा महेंद्र प्रताप सिंह के जीवन, संघर्ष, त्याग और देश के प्रति योगदान पर केंद्रित इस संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में नगर के विद्वानों, साहित्यकारों, अधिवक्ताओं, समाजसेवियों एवं कवियों ने अपने विचारों के माध्यम से राजा महेंद्र प्रताप के जीवन और योगदान को याद किया। विचार संगोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ अधिवक्ता मुन्ना सिंह पुंडीर ने की, जबकि संचालन वरिष्ठ संपादक एवं ओज कवि हरिनाम दास सांचा ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान गणेश की प्रतिमा के समक्ष मुन्ना सिंह पुंडीर एडवोकेट, डॉ. राजेश कुमार, हरिनाम दास सांचा, राजेश गौतम एडवोकेट, प्रभु दयाल प्रभु, प्रदीप पंडित एवं जाट महाकवि सबरस मुरसानी सहित अन्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया।
मुख्य वक्ता बागला महाविद्यालय हाथरस के वरिष्ठ साहित्यकार एवं हिंदी विभाग के प्रोफेसर डॉ. राजेश कुमार ने राजा महेंद्र प्रताप सिंह के जीवन चरित्र पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि राजा महेंद्र प्रताप ने स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और देश की आजादी के लिए विदेशों में भी सक्रिय रहे। उन्होंने कहा कि राजा महेंद्र प्रताप के नाम पर हाथरस में भी कोई शिक्षण अथवा साहित्यिक संस्थान स्थापित किया जाना चाहिए, जिससे आने वाली पीढ़ियां उनके त्याग, संघर्ष और योगदान से परिचित हो सकें। शैलेंद्र सर्राफ ने राजा महेंद्र प्रताप के जीवन पर आधारित डाक टिकट एवं सिक्के प्रस्तुत करते हुए उनके नाम पर संस्थान स्थापित किए जाने का सुझाव दिया। वहीं जाट महाकवि सबरस मुरसानी ने हास्य रचनाओं से दर्शकों को खूब गुदगुदाया। प्रभु दयाल दीक्षित, प्रदीप पंडित और मनोज द्विवेदी सहित अन्य कवियों ने अपनी कविताओं के माध्यम से राजा महेंद्र प्रताप के जीवन एवं देशभक्ति की भावना को प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए हरिनाम दास सांचा ने राजा महेंद्र प्रताप सिंह के जीवन से जुड़े विभिन्न प्रसंगों पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राजा महेंद्र प्रताप का जन्म 1 दिसंबर 1886 को मुरसान रियासत, हाथरस में हुआ था। वे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के साथ पत्रकार, लेखक, क्रांतिकारी, समाज सुधारक और दानवीर के रूप में भी जाने गए। उन्होंने विदेशों में रहकर भारत की स्वतंत्रता के लिए प्रयास किए और आजादी के आंदोलन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थन दिलाने का प्रयास किया। संगोष्ठी में अतुल आंधीवाल एडवोकेट, पूर्व अध्यक्ष डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन, राजेश कुमार गौतम एडवोकेट, जी. सिंह, राजेश उपाध्याय सहित अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे। अध्यक्षता कर रहे अधिवक्ता मुन्ना सिंह पुंडीर ने राजा महेंद्र प्रताप के जीवन एवं देश के लिए उनके योगदान को याद करते हुए कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों और समाजसेवियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के दौरान बाल नृत्य कलाकार काव्य अग्रवाल ने देशभक्ति गीत पर नृत्य प्रस्तुत कर माहौल में जोश भर दिया। विभिन्न शिक्षण संस्थानों से पहुंचीं छात्राओं हर्षिता भास्कर, शशि कुमारी, शालू सिंह और साक्षी शर्मा तथा मोटिवेटर रोहित चौधरी ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए राजा महेंद्र प्रताप सिंह को श्रद्धासुमन अर्पित किए।
कार्यक्रम की व्यवस्थाओं में राहुल गुप्ता (ट्रांसपोर्ट), संजीव वार्ष्णेय एडवोकेट, भोलू पंडित एडवोकेट, सुधीर चौधरी एडवोकेट, महेंद्र सिंह दीवानियां एडवोकेट, पुष्पेंद्र गौतम एडवोकेट, अजय दीक्षित एडवोकेट, मतेन्द्र सिंह गहलौत, मोहित कश्यप एडवोकेट, दामिनी वार्ष्णेय एडवोकेट, देवेश दीक्षित एडवोकेट, केविंद्र सिंह चौहान एडवोकेट, नरेंद्र कुमार भारद्वाज एडवोकेट, दिनेश बघेल एडवोकेट, सरताज खान एडवोकेट, दीपक रवि अग्रवाल, विमल कुमार एडवोकेट, देवांशु वशिष्ठ एडवोकेट, राजू वार्ष्णेय एडवोकेट, प्रमोद कटारा एडवोकेट, पंकज शर्मा एडवोकेट, मेला ठेकेदार ध्रुव दीक्षित, योगेश वार्ष्णेय, वासुदेव वार्ष्णेय उर्फ चंदन, अनिल वार्ष्णेय, हेमंत गुप्ता, अरुण उपाध्याय, कृष्ण कुमार वार्ष्णेय उर्फ बिट्टू, सौरभ सक्सेना, कृष्णा वार्ष्णेय, गौरांग गर्ग, हिमांशु वार्ष्णेय, अक्षय सहित अन्य लोगों का योगदान रहा। इस अवसर पर कार्यक्रम में पहुंचे अतिथियों एवं आयोजन में सहयोग करने वाले गणमान्य लोगों का अंगवस्त्र एवं प्रतीक चिन्ह भेंट कर स्वागत और सम्मान किया गया। कार्यक्रम के संयोजक राघव वार्ष्णेय एडवोकेट एवं सहसंयोजक मयंक वार्ष्णेय ने सभी अतिथियों, वक्ताओं, समाजसेवियों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। आयोजकों ने कहा कि राजा महेंद्र प्रताप सिंह के जीवन और देश के लिए किए गए संघर्ष की जानकारी नई पीढ़ी तक पहुंचाना इस आयोजन का प्रमुख उद्देश्य रहा।











