पुलिस के अनुसार, नीरेश उर्फ नीरे उर्फ श्यामपाल गैंगस्टर अधिनियम के वर्ष 2006 के एक मुकदमे में वारंट जारी होने के बाद से फरार चल रहा था। उसके आपराधिक इतिहास में हत्या के प्रयास, लूट, गैंगस्टर अधिनियम, गुंडा अधिनियम, एनडीपीएस अधिनियम और शस्त्र अधिनियम समेत विभिन्न गंभीर धाराओं के मामले शामिल हैं। वह थाना सादाबाद का हिस्ट्रीशीटर एचएस नंबर 10ए भी है। पुलिस के मुताबिक, लंबे समय से फरार चल रहे अभियुक्त की गिरफ्तारी को एसपी हाथरस ने गंभीरता से लिया। उनके निर्देश पर सीओ सादाबाद के नेतृत्व में थाना सादाबाद पुलिस ने अभियुक्त के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड, संभावित ठिकानों और संपर्कों के संबंध में जानकारी जुटाई। सर्विलांस सेल की तकनीकी सहायता से डिजिटल सूचनाओं का विश्लेषण किया गया और यक्ष एप के माध्यम से उपलब्ध पुलिस डाटाबेस की भी मदद ली गई। कई दिनों की सुरागरसी, तकनीकी विश्लेषण और जमीनी स्तर पर की गई पुलिसिंग के बाद पुलिस को अभियुक्त के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी मिली। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तारी से बचने के लिए नीरेश अपनी पहचान छिपाकर रह रहा था। वह लंबे समय से मथुरा-वृंदावन क्षेत्र में अलग-अलग स्थानों पर ठिकाने बदल रहा था और पहचान छिपाने के लिए साधु सहित कई तरह के भेष धारण करता था। पुलिस टीम ने प्राप्त सूचना को विकसित करते हुए उसकी गतिविधियों पर नजर रखी। मुखबिर से मिली सटीक सूचना के आधार पर थाना सादाबाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उसे सादाबाद-राया बॉर्डर से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, नीरेश वर्ष 2006 के गैंगस्टर अधिनियम के मुकदमे में फरार था। लगातार फरार रहने के कारण एसपी हाथरस ने 18 सितंबर 2026 को उसकी गिरफ्तारी पर 25 हजार रुपये का पुरस्कार घोषित किया था। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उसके खिलाफ आगे की आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।