
लखनऊ 21 सितम्बर। उत्तर प्रदेश के लाखों आयकरदाताओं से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने आयकर बकाया की वसूली से जुड़े तय नियमों में बदलाव किया है। नए प्रावधानों के तहत बकाया कर की वसूली के दौरान गिरफ्तारी और सिविल जेल में हिरासत से संबंधित प्रावधानों को हटा दिया गया है। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि आयकर की बकाया मांग समाप्त हो गई है। बकाया कर की वसूली के लिए आयकर विभाग की अन्य कानूनी शक्तियां पहले की तरह बनी रहेंगी। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने आयकर नियमावली-2026 के नियम 225 में बदलाव को लेकर अधिसूचना जारी की है। बताया गया है कि यह बदलाव 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी माना गया है। अधिसूचना में गिरफ्तारी और हिरासत से संबंधित कई उपनियमों को भी समाप्त किया गया है। उत्तर प्रदेश में इस बदलाव का दायरा काफी बड़ा है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश से करीब 93.3 लाख आयकर रिटर्न दाखिल किए गए हैं। देशभर में दाखिल कुल आयकर रिटर्न में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी करीब 10 प्रतिशत बताई गई है। इस मामले में महाराष्ट्र करीब 1.40 करोड़ रिटर्न के साथ पहले स्थान पर है, जबकि उत्तर प्रदेश दूसरे स्थान पर है। इसके बाद गुजरात, राजस्थान और तमिलनाडु का स्थान है।
वरिष्ठ कर सलाहकार राजीव मेहरोत्रा के मुताबिक नियमों से ‘गिरफ्तारी और सिविल हिरासत’ से जुड़े प्रावधान हटाए गए हैं, लेकिन इससे आयकर की बकाया मांग खत्म नहीं होती और न ही विभाग की वसूली संबंधी अन्य शक्तियां समाप्त होती हैं। बकाया कर की वसूली के लिए संपत्ति को सीज करने जैसी कानूनी शक्तियां विभाग के पास बनी रहेंगी।उत्तर प्रदेश में आयकर विभाग की ओर से तलाशी और सर्वे की कार्रवाई भी जारी रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार वर्ष 2019 से 2025 के बीच आयकर अधिनियम के तहत प्रदेश में करीब 3,025 लोगों की गिरफ्तारियां हुईं। इनमें वर्ष 2023 में सबसे अधिक 1,122 गिरफ्तारियां दर्ज की गईं। इसी अधिसूचना में वैल्यूअर और अधिकृत आयकर प्रैक्टिशनर के पंजीकरण से संबंधित समयसीमा में भी बदलाव किया गया है। पंजीकरण की अंतिम तारीख 30 सितंबर 2026 से बढ़ाकर 31 मार्च 2027 कर दी गई है। इससे संबंधित लोगों को पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी करने के लिए छह महीने का अतिरिक्त समय मिल गया है।










