
हाथरस 29 अगस्त। जिले में इन दिनों वायरल संक्रमण का प्रकोप तेजी से बढ़ता नजर आ रहा है। हालात यह हैं कि परिवार में एक सदस्य के बीमार पड़ने के बाद धीरे-धीरे अन्य सदस्य भी संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं। सर्दी-जुकाम, खांसी, तेज बुखार और बदन दर्द की शिकायत लेकर बड़ी संख्या में मरीज चिकित्सकों के पास पहुंच रहे हैं। रक्षाबंधन के त्योहार पर सरकारी अस्पतालों के साथ अधिकांश निजी चिकित्सालयों में भी चिकित्सकों की उपलब्धता प्रभावित रही, जिसके चलते मरीजों को इलाज के लिए परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि जिला अस्पताल की इमरजेंसी में मरीजों को उपचार की सुविधा मिलती रही।
जानकारी के अनुसार बृहस्पतिवार रात 12 बजे से शाम चार बजे तक जिला अस्पताल की इमरजेंसी में 124 मरीज उपचार के लिए पहुंच चुके थे। सुबह करीब आठ बजे के बाद तेज बुखार और वायरल संक्रमण से पीड़ित मरीजों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हुआ। शाम तक 27 मरीज वायरल बुखार की शिकायत लेकर इमरजेंसी पहुंचे। वहीं जिला अस्पताल की ओपीडी रक्षाबंधन के दिन केवल सुबह 11 बजे तक संचालित हुई। इन तीन घंटों के दौरान 416 मरीजों ने चिकित्सकों से परामर्श लिया। इनमें 86 मरीज वायरल बुखार, सर्दी-जुकाम आदि लक्षणों से पीड़ित पाए गए। ओपीडी का समय समाप्त होने के बाद पहुंचने वाले मरीजों को वापस लौटना पड़ा।
मौसम में बदलाव से बढ़ रहा संक्रमण
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ एसके राजू के मुताबिक मौसम में लगातार बदलाव और उमस के बीच वायरल संक्रमण तेजी से फैल रहा है। परिवार में किसी एक व्यक्ति के संक्रमित होने पर उसके संपर्क में आने वाले अन्य सदस्यों के भी संक्रमित होने की आशंका रहती है। ऐसे में बच्चों और बुजुर्गों को लेकर विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। लोगों को संक्रमण से बचाव के लिए छींकते और खांसते समय मुंह ढकने, हाथों की नियमित सफाई करने तथा संक्रमित व्यक्ति से उचित दूरी बनाए रखने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि वायरल के लक्षण दिखाई देने पर बिना चिकित्सकीय सलाह के खुद से दवा लेने से बचना चाहिए और चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, पर्याप्त आराम करना और पौष्टिक भोजन लेना भी शरीर को संक्रमण से लड़ने में मदद करता है। त्योहार के दौरान भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचने और आवश्यकता पड़ने पर मास्क का इस्तेमाल करने की भी सलाह दी गई है। वरिष्ठ चिकित्सक डॉ एसके राजू के अनुसार सावधानी और समय पर उपचार के जरिए संक्रमण के प्रसार को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।












