
हाथरस 29 अगस्त । मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संचालित जननी सुरक्षा योजना में हाथरस जिले ने शानदार प्रदर्शन किया है। योजना के तहत गर्भवती महिलाओं के खातों में डीबीटी के माध्यम से प्रोत्साहन राशि पहुंचाने के मामले में हाथरस अलीगढ़ मंडल के साथ-साथ पूरे उत्तर प्रदेश में प्रथम स्थान पर पहुंच गया है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में अब तक 7,545 संस्थागत प्रसव हुए हैं। इनमें से 6,649 प्रसूताओं के खातों में जननी सुरक्षा योजना की प्रोत्साहन राशि सफलतापूर्वक भेजी जा चुकी है। यह कुल संस्थागत प्रसवों का 88.12 प्रतिशत है।
सासनी, मुरसान और सादाबाद का शानदार प्रदर्शन
स्वास्थ्य केंद्रों की बात करें तो मुरसान में 516 प्रसव और सादाबाद में 777 प्रसव के सापेक्ष भुगतान का प्रतिशत 100 प्रतिशत से अधिक दर्ज किया गया है। वहीं सासनी में 534 प्रसवों के सापेक्ष 541 लाभार्थियों को भुगतान किया गया, जो 101.31 प्रतिशत है। हसायन में 728 लाभार्थियों में से 717 को तथा सिकंदराराऊ में 828 प्रसवों के सापेक्ष 816 महिलाओं को योजना की धनराशि प्राप्त हो चुकी है।
जिला महिला अस्पताल में 884 प्रसूताओं को मिला लाभ
जिला महिला अस्पताल में कुल 905 प्रसव कराए गए, जिनमें से 884 प्रसूताओं के खातों में जननी सुरक्षा योजना की प्रोत्साहन राशि पहुंचाई जा चुकी है। सके अलावा सहपऊ में 345 प्रसवों के सापेक्ष 342 तथा महौ में 455 प्रसवों के सापेक्ष 374 लाभार्थियों को भुगतान किया गया है।
शहरी स्वास्थ्य केंद्रों में भी भुगतान की स्थिति
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में यूपीएचसी रानी का नगला ने 100 प्रतिशत भुगतान कर बेहतर प्रदर्शन किया है। वहीं मधुगढ़ी में 83.33 प्रतिशत, सिकंदराराऊ में 74.07 प्रतिशत, सादाबाद में 72.15 प्रतिशत और जलेसर रोड में 50 प्रतिशत प्रोत्साहन राशि लाभार्थियों के खातों में भेजी गई है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि योजना के तहत शत-प्रतिशत पात्र लाभार्थियों को समय से सीधे उनके खातों में राशि पहुंचाना प्राथमिकता है। आशा कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य कर्मियों के बेहतर समन्वय से जिले में संस्थागत प्रसवों को लगातार बढ़ावा मिल रहा है। इससे जहां महिलाओं को सुरक्षित प्रसव की सुविधा मिल रही है, वहीं मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण प्रगति हो रही है। हाथरस का प्रदेश में प्रथम स्थान हासिल करना स्वास्थ्य विभाग के प्रयासों की महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है












