
हाथरस 27 अगस्त। नेत्रदान पखवाड़े के दौरान देहदान कर्तव्य संस्था ने हाथरस शहर में पहली बार नेत्रदान की प्रक्रिया सफलतापूर्वक संपन्न कराई। संस्था द्वारा श्रॉफ आई केयर, वृंदावन के सहयोग से यह 127वां नेत्रदान सौहार्दपूर्ण वातावरण में कराया गया। इस पहल को समाज में मानवता और संवेदनशीलता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। बसंत बाग निवासी मधुबाला अग्रवाल पत्नी स्वर्गीय मोहनलाल अग्रवाल ने जीवित रहते हुए नेत्रदान का संकल्प लिया था। उनके निधन के बाद पुत्र राजीव अग्रवाल सहित पूरे परिवार ने उनके संकल्प को पूरा कराने में पूर्ण सहयोग किया। परिवार की सहमति और सहयोग से उनकी आंखें दान की गईं। संस्था की सक्रिय सदस्य शालिनी मित्तल ने डॉ. एसके गौड़ को फोन कर मधुबाला अग्रवाल के नेत्रदान की जानकारी दी। सूचना मिलते ही डॉ. गौड़ ने श्रॉफ आई केयर के डॉ. रोशन को सूचित किया। चिकित्सक ने शीघ्र पहुंचकर नेत्रदान की प्रक्रिया को पूरा कराया। संस्था की ओर से बताया गया कि पूरी प्रक्रिया के दौरान परिवार के किसी सदस्य को अनावश्यक परेशानी नहीं हुई और सूचना मिलने के बाद संस्था ने शेष कार्य निर्विघ्न रूप से संपन्न कराया।
समाजसेवी योगेंद्र शर्मा ‘योगा पंडित’ ने कहा कि हाथरस शहर में पहली बार इस तरह नेत्रदान होना सभी के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है। उन्होंने मधुबाला अग्रवाल के परिवार की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने जीवित रहते लिए गए संकल्प को पूरा कर मानवता की मिसाल कायम की है। योगा पंडित ने कहा कि व्यक्ति चाहे कितनी भी धन-दौलत दान कर दे, उससे मिलने वाली सुख-सुविधाओं का लाभ तो लिया जा सकता है, लेकिन किसी को देखने की रोशनी नहीं दी जा सकती। किसी को रोशनी दान करना अपनी आंखें दान करने के समान है और यह किसी जरूरतमंद को नया एवं उत्साहपूर्ण जीवन देने जैसा पुनीत कार्य है। संस्था के सचिव डॉ. जयंत शर्मा ने कहा कि हाथरस में उठाया गया यह पहला कदम दर्शाता है कि लोग संस्था के कार्यों को प्राथमिकता देते हुए सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि समाज में रूढ़िवादिता को छोड़कर मानवीयता को प्राथमिकता देने की भावना बढ़ रही है और लोग नेत्रदान जैसी मुहिम में आगे आ रहे हैं। डॉ. एसके गौड़ ने कहा कि ऐसे मानवीय कार्यों से समाज में मानवता को बल मिलता है। उन्होंने लोगों से नेत्रदान की मुहिम में सहयोगी बनने का आह्वान किया। इस कार्य में संस्था के एडमिन राजीव अग्रवाल का विशेष योगदान रहा। मधुबाला अग्रवाल का यह नेत्रदान न केवल उनके परिवार के संकल्प और संवेदनशीलता को दर्शाता है, बल्कि समाज के अन्य लोगों को भी मरणोपरांत नेत्रदान के लिए प्रेरित करने वाला कदम है।










