
हाथरस 27 अगस्त। सरकार द्वारा सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने और आम उपभोक्ताओं को बिजली बिल में राहत देने के लिए चलाई जा रही योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े हो रहे हैं। मुंशी गजाधर सिंह मार्ग निवासी 91 वर्षीय पूर्व जिला पंचायत सदस्य सुनीता कुमारी ने आरोप लगाया है कि उनके आवास पर स्थापित सोलर सिस्टम से उत्पादित बिजली की रीडिंग पिछले दो महीनों से मुख्य बिजली मीटर की रीडिंग में समायोजित नहीं की जा रही है। इसके चलते उन्हें सोलर सिस्टम होने के बावजूद पूरा बिजली बिल जमा करना पड़ रहा है। सुनीता कुमारी के अनुसार उन्होंने इस संबंध में दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (डीवीवीएनएल) के अधिकारियों से लगातार शिकायत की, लेकिन अभी तक समस्या का समाधान नहीं हुआ है। उनका आरोप है कि विभागीय लापरवाही के चलते सोलर सिस्टम का उन्हें अपेक्षित आर्थिक लाभ नहीं मिल पा रहा है।
उन्होंने बताया कि इस मामले में मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर 14 जुलाई को शिकायत दर्ज कराई गई थी। उनका आरोप है कि समस्या का समाधान किए बिना ही 21 जुलाई को शिकायत का निस्तारण कर दिया गया और इसकी सूचना उन्हें मोबाइल पर एसएमएस के माध्यम से प्राप्त हुई। सुनीता कुमारी के मुताबिक, जुलाई 2026 में उन्हें ₹2,935 का बिजली बिल जारी किया गया, जबकि अगस्त 2026 के बिल में 623 यूनिट खपत दर्शाते हुए ₹3,689.60 का बिल आया है। उनका कहना है कि इन बिलों में सोलर प्लांट से उत्पादित बिजली का समुचित समायोजन नहीं किया गया। यदि सोलर बिजली की रीडिंग नियमानुसार समायोजित की जाए तो बिजली बिल में काफी कमी आ सकती है।
‘सोलर की रीडिंग समायोजित नहीं कर सकते तो सिस्टम ही हटवा दीजिए’
91 वर्षीय सुनीता कुमारी ने भावुक होकर कहा, “यदि विभाग हमारे सोलर की रीडिंग को बिल में समायोजित नहीं कर सकता, तो कृपया हमारा सोलर सिस्टम ही हटवा दीजिए। कम से कम बार-बार शिकायत करने और मानसिक तनाव झेलने से तो मुक्ति मिलेगी।” उन्होंने राज्य सरकार और विद्युत निगम के उच्च अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा जल्द समस्या का समाधान कराने की मांग की है, ताकि उन्हें सौर ऊर्जा योजना का वास्तविक लाभ मिल सके। यह मामला एक अति वरिष्ठ नागरिक की परेशानी के साथ-साथ सोलर ऊर्जा योजनाओं के जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन और बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है। यदि ऐसे मामलों का समय पर समाधान नहीं हुआ तो सौर ऊर्जा अपनाने वाले अन्य उपभोक्ताओं के बीच भी योजनाओं को लेकर निराशा पैदा हो सकती है।










