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सादाबाद 17 अगस्त। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) का अनिश्चितकालीन धरना आज आठवें दिन भी जारी रहा। किसान चार सूत्रीय मांगों को लेकर तहसील परिसर में डटे हुए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक सरकार और प्रशासन उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं करता, आंदोलन समाप्त नहीं होगा। किसानों की प्रमुख मांगों में आलू के कोल्ड स्टोरेज का भाड़ा माफ करना, आलू का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1600 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित करना, किसान रजिस्ट्री बंद करना और किसानों की संपूर्ण कर्जमाफी शामिल हैं। किसानों का कहना है कि बढ़ती लागत और फसल का उचित मूल्य न मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति लगातार खराब हो रही है। किसान नेता चंद्रेश चौधरी ने बताया कि 10 अगस्त से शुरू हुआ यह धरना लगातार आठ दिनों से चल रहा है। उन्होंने खेद व्यक्त किया कि अभी तक सरकार या प्रशासन का कोई प्रतिनिधि किसानों से बात करने या आश्वासन देने नहीं पहुंचा है। किसी भी जनप्रतिनिधि ने भी किसानों से मुलाकात नहीं की है। चौधरी ने आरोप लगाया कि सभी राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों को आलू किसानों के वोट तो चाहिए, लेकिन उनकी समस्याओं के समाधान में कोई साथ देने को तैयार नहीं है। चुनाव के समय किसानों को याद किया जाता है, जबकि बाद में उनकी समस्याओं को भुला दिया जाता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने आलू किसानों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। चौधरी ने कहा कि किसान अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे। यदि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो देश में आलू का गंभीर संकट खड़ा हो सकता है, जिससे लोगों को आलू के लिए तरसना पड़ सकता है। किसान नेताओं ने प्रशासन से तत्काल वार्ता कर चारों मांगों पर ठोस निर्णय लेने की मांग की है। धरना स्थल पर किसान लगातार नारेबाजी करते हुए आन्दोलन को जारी रखे हुए हैं।

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