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हाथरस 03 जून। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. विजय सिंह ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में राज्य योजना के अंतर्गत नैपियर घास की जड़ें (रूट स्लिप) उपलब्ध कराने की योजना संचालित की जा रही है। योजना का उद्देश्य हरे चारे के उत्पादन को बढ़ावा देना तथा गौशालाओं एवं पशुपालकों को गुणवत्तापूर्ण चारा उपलब्ध कराना है। उन्होंने बताया कि योजना का लाभ पंजीकृत गौशालाओं, गौआश्रय स्थलों, इच्छुक कृषकों, पशुपालकों तथा गैर-सरकारी संस्थाओं को दिया जाएगा, जिनके पास न्यूनतम 0.2 हेक्टेयर सिंचित भूमि उपलब्ध हो तथा जहां आवागमन की सुविधा सुगम हो। लाभार्थी चयन में पंजीकृत गौशालाओं एवं अस्थायी गौआश्रय स्थलों से संबंधित ग्राम पंचायतों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिनके पास चारागाह के लिए सिंचित भूमि उपलब्ध हो तथा जो गौआश्रय स्थल से टैग्ड हों। इच्छुक कृषक एवं पशुपालक श्रेणी में चयन के दौरान अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति परिवारों तथा महिला मुखिया परिवारों की महिलाओं को प्राथमिकता प्रदान की जाएगी। योजना के अंतर्गत नैपियर सीड तैयार करने एवं नैपियर चारा उत्पादन हेतु चयनित लाभार्थियों को प्रथम वर्ष में निःशुल्क नैपियर की गांठें एवं जड़ें उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके बदले लाभार्थी को सहमति पत्र देना होगा, जिसके अनुसार अगले वित्तीय वर्ष में प्राप्त निःशुल्क जड़ों एवं गांठों की संख्या के सापेक्ष दोगुनी संख्या में जड़ें विभाग को निःशुल्क उपलब्ध करानी होंगी, ताकि अन्य लाभार्थियों को भी इसका लाभ मिल सके।मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि नैपियर सीड विभागीय पशुधन प्रक्षेत्रों पर भी तैयार की जाएगी, जहां से चयनित लाभार्थियों को प्रथम वर्ष में निःशुल्क जड़ें उपलब्ध कराई जाएंगी तथा आवश्यक तकनीकी सहयोग भी प्रदान किया जाएगा। योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को 0.2 हेक्टेयर भूमि पर तहसील स्तर पर सीड बैंक तैयार करने के लिए विभागीय पशुधन प्रक्षेत्रों से निःशुल्क नैपियर जड़ें उपलब्ध कराई जाएंगी। वहीं खेत की तैयारी, खाद एवं उर्वरक, सिंचाई तथा अन्य कृषि क्रियाओं के लिए 20 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से अनुदान सहायता प्रदान की जाएगी। यह अनुदान दो किश्तों में लाभार्थियों के खाते में उपलब्ध कराया जाएगा।

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