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हाथरस/सिकंदराराऊ 03 जून। कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत आज एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें सिकंदराराऊ के ग्राम खेड़िया खुर्द के किसानों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम में किसानों को हरी खाद फसल ढैंचा के महत्व एवं उसके कृषि लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि ढैंचा मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके प्रयोग से भूमि में जैविक पदार्थों एवं नाइट्रोजन की मात्रा में वृद्धि होती है, जिससे फसलों की वृद्धि और उत्पादन क्षमता बेहतर होती है। वैज्ञानिकों ने किसानों को बताया कि ढैंचा रासायनिक उर्वरकों का एक प्रभावी, पर्यावरण अनुकूल एवं किफायती विकल्प है। इसके उपयोग से मिट्टी की संरचना मजबूत होती है, जल धारण क्षमता बढ़ती है तथा लाभकारी सूक्ष्मजीवों की सक्रियता में वृद्धि होती है। ढैंचा को खेत में पलटने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व प्राकृतिक रूप से प्राप्त होते हैं, जिससे मृदा स्वास्थ्य में सुधार होता है और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा मिलता है। कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. बलवीर सिंह, डॉ. हरविंदर पाल, डॉ. आकांक्षा सिंह एवं डॉ. शैलजा देवी उपस्थित रहे। उन्होंने किसानों की विभिन्न जिज्ञासाओं का समाधान किया तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण और सतत कृषि प्रणाली को अपनाने के लिए ढैंचा की खेती को बढ़ावा देने का आह्वान किया। इस अवसर पर उपस्थित अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (SC/ST) वर्ग के किसानों को अनुसूचित जाति उपयोजना (SCSP) के अंतर्गत धान बीज का वितरण भी किया गया। वैज्ञानिकों ने किसानों को उन्नत धान उत्पादन तकनीकों की जानकारी देते हुए गुणवत्तायुक्त एवं प्रमाणित बीजों के उपयोग के लिए प्रेरित किया। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने कहा कि हरी खाद का प्रयोग न केवल मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार करता है, बल्कि रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम कर खेती की लागत घटाने में भी सहायक सिद्ध होता है। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को टिकाऊ एवं लाभकारी कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक करना तथा कृषि उत्पादन को अधिक समृद्ध एवं पर्यावरण अनुकूल बनाना है।

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