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मथुरा 02 जून । नशा नाश की जड़ है, भले काम से मुंह मत मोड़ो, तम्बाकू की आदत छोड़ो आदि स्लोगनों तथा नुक्कड़ नाटक के माध्यम से विश्व तम्बाकू निषेध दिवस पर के.डी. डेंटल कॉलेज एण्ड हॉस्पिटल के छात्र-छात्राओं ने के.डी. हॉस्पिटल में जन-जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को व्यसन त्यागने का संदेश दिया। के.डी. विश्वविद्यालय के प्रो-चांसलर मनोज अग्रवाल ने अपने संदेश में जूनियर डॉक्टरों के अभिनव प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि समाज को स्वस्थ रखने में चिकित्सकों की अहम भूमिका है। श्री अग्रवाल ने कहा कि डॉक्टरों को सिर्फ एक दिन नहीं बल्कि हर दिन जागरूकता के प्रयास करने चाहिए क्योंकि चिकित्सकों की सीख का समाज पर अच्छा असर होता है। मुख्य कार्यकारी अधिकारी अरुण अग्रवाल ने भावी चिकित्सकों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि जागरूकता से ही किसी भी तरह की गलत आदत को रोका जा सकता है। केडी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. मनेष लाहौरी ने अपने सम्बोधन में लोगों को तम्बाकू के सेवन से होने वाले जानलेवा दुष्परिणामों से अवगत कराया। डॉ. लाहौरी ने लोगों को तम्बाकू और धूम्रपान से होने वाले खतरों से आगाह करते हुए कहा कि तम्बाकू धीमे जहर के रूप में समाज के सभी वर्गों को प्रभावित कर रही है। देश में हर दूसरा व्यक्ति आज बीड़ी, सिगरेट, तम्बाकू आदि की गिरफ्त में है। डॉ. लाहौरी ने सलाह दी कि मौखिक स्वच्छता से हर इंसान स्वस्थ जीवन जी सकता है। के.डी. मेडिकल कॉलेज-हॉस्पिटल एण्ड रिसर्च सेण्टर के डीन और प्राचार्य डॉ. आर.के. अशोका ने बताया कि तम्बाकू चबाने से मुंह, गला, अमाशय, यकृत और फेफड़े के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। तम्बाकू जनित रोगों में सबसे ज्यादा मामले फेफड़े और रक्त से सम्बन्धित रोगों के हैं जिनका इलाज महंगा और जटिल है। बेहतर होगा कि जिन लोगों के मुंह में किसी तरह की परेशानी है, उसे तत्काल चिकित्सक को दिखाना चाहिए क्योंकि मुंह के छोटे-छोटे छाले बड़ा रूप ले सकते हैं। डॉ. अशोका ने कहा कि साल 2026 का थीम “अनमास्किंग द अपील: निकोटिन एवं तम्बाकू की लत के विरुद्ध संघर्ष” है। के.डी. डेंटल कॉलेज एण्ड हॉस्पिटल की प्राचार्या डॉ. नवप्रीत कौर, के.डी. मेडिकल कॉलेज-हॉस्पिटल एण्ड रिसर्च सेण्टर की उप-प्राचार्या डॉ. गगनदीप कौर ने भी मरीजों और उनके अटेण्डरों को तम्बाकू एवं धूम्रपान से होने वाले खतरों से आगाह किया। भावी चिकित्सकों ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से तम्बाकू और निकोटिन के दुष्प्रभावों पर प्रभावी ढंग से प्रकाश डाला, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। नुक्कड़ नाटक के तुरंत बाद शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया गया, जिसमें उपस्थित छात्र-छात्राओं, स्वास्थ्य कर्मियों तथा अटेंडरों ने तम्बाकू मुक्त जीवन जीने की शपथ ली। इस अवसर पर ओपीडी रोगियों के लिए एक स्वास्थ्य शिक्षा सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें बेहतर मौखिक और प्रणालीगत स्वास्थ्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में तम्बाकू बंद करने पर जोर दिया गया। उपस्थित लोगों ने करतल ध्वनि से नुक्कड़ नाटक की प्रशंसा की तथा माना कि तम्बाकू मुक्त जीवन शैली को बढ़ावा देने के लिए यह एक प्रभावशाली पहल है।

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