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सादाबाद 01 जून । क्षेत्र में रविवार शाम तेज आंधी-तूफान और ओलावृष्टि से किसानों की फसलें बर्बाद हो गईं। अचानक बदले मौसम के कारण बाजरा, मक्का, उड़द, मूंग, तरबूज और खरबूज जैसी फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। किसानों के लिए नुकसान का अंदाजा लगाना भी मुश्किल हो रहा है। मौसम विभाग की चेतावनी के बावजूद, रविवार शाम आसमान में काले बादल छा गए और 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने लगीं। इसके बाद हुई ओलावृष्टि ने खेतों में खड़ी फसलों को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया। किसानों के अनुसार, लगभग 50 से 70 ग्राम वजन के बड़े ओले गिरे, जिससे फसलों को गंभीर क्षति हुई। इस प्राकृतिक आपदा से तरबूज और खरबूज की खेती करने वाले किसानों को सर्वाधिक नुकसान हुआ है। ओलों की मार से खेतों में पड़े फल फट गए और वे बिक्री योग्य नहीं रहे। बाजरे की फसल पूरी तरह जमीन पर गिर गई, जबकि मक्का की बालियां टूटकर दाने खेतों में बिखर गए। उड़द और मूंग की फसलें भी बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। सोमवार सुबह जब किसान तेजवीर सिंह, हरदम सिंह, प्रीतम चंद, राजवीर सिंह, अनेक सिंह अपने खेतों पर पहुंचे, तो तबाही का मंजर देखकर वे निराश हो गए। कई किसान खेत की मेड़ पर बैठकर हुए नुकसान का आकलन करते दिखे। किसानों का कहना है कि उन्होंने कर्ज लेकर खेती की थी और अब फसल बर्बाद होने से उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। वे शासन से मुआवजे और राहत की उम्मीद कर रहे हैं। प्रशासन ने भी नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है। उपजिलाधिकारी मनीष चौधरी ने बताया कि आंधी और ओलावृष्टि से प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कराया जा रहा है। लेखपालों को फसल क्षति का आंकलन करने के निर्देश दिए गए हैं। सर्वे रिपोर्ट तैयार होने के बाद शासन को भेजी जाएगी, ताकि प्रभावित किसानों को नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

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