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मथुरा 29 मई । दिल्ली और जयपुर से निराश लौटे मथुरा निवासी सोनपाल सिंह पुत्र दिगम्बर सिंह को के.डी. मेडिकल कॉलेज-हॉस्पिटल एण्ड रिसर्च सेण्टर के विशेषज्ञ सीटीवीएस सर्जन डॉ. वरुण सिसोदिया और उनकी टीम ने जीने की नई आस दी है। डॉ. सिसोदिया ने क्षय रोग से पीड़ित 32 वर्षीय सोनपाल सिंह के बाएं फेफड़े के दोनों छिद्रों को सर्जरी के माध्यम से बंद कर तथा सीने में जमा मवाद को हटाकर उसे नया जीवन दिया है। ऑपरेशन लगभग चार घंटे चला। पूरी तरह से स्वस्थ होने के बाद सोनपाल सिंह को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। चिकित्सकों से मिली जानकारी के अनुसार मथुरा निवासी सोनपाल सिंह को पिछले चार महीने से सीने में दर्द तथा सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। परेशानी बढ़ती देख परिजन उसे मथुरा के एक निजी अस्पताल ले गए जहां विभिन्न जांचों के बाद पता चला कि उसके सीने में टीबी है तथा भारी मात्रा में मवाद जमा है। मरीज के सीने से मवाद निकालने के लिए ट्यूब डाली गई। कुछ दिन तक सही रहने के बाद उसे पुनः परेशानी बढ़ गई। परिजन फिर उसे उसी हॉस्पिटल ले गए जहां मरीज को ट्यूब डाली गई थी। चिकित्सकों ने मरीज के परिजनों को बताया कि ब्रज क्षेत्र में इसकी सर्जरी करने वाले नहीं हैं, इसकी सर्जरी दिल्ली, जयपुर या लखनऊ में सम्भव है। मरीज को पहले जयपुर फिर दिल्ली ले जाया लेकिन वहां ऑपरेशन का खर्च बहुत अधिक था जोकि उसके लिए वहन कर पाना सम्भव नहीं था। निराश परिजन 13 मई को मरीज को के.डी. हॉस्पिटल लाए तथा कॉर्डियक थारेसिस वैस्क्यूलर सर्जरी विभाग (सीटीवीएस) के सर्जन डॉ. वरुण सिसोदिया को दिखाया। डॉ. सिसोदिया ने सभी जांचों का निरीक्षण करने के बाद ऑपरेशन की सलाह दी। परिजनों की स्वीकृति के बाद 20 मई को डॉ. वरुण सिसोदिया के मार्गदर्शन में मरीज का ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन लगभग चार घंटे चला।

इस ऑपरेशन में डॉ. सिसोदिया का सहयोग डॉ. आकाश कटियार, डॉ. कार्तिकेय, निश्चेतना विशेषज्ञ डॉ. प्रतिमा तथा टेक्नीशियन योगेश कुमार ने किया। डॉ. सिसोदिया ने बताया कि ऑपरेशन बहुत मुश्किल था। मरीज के बाएं फेफड़े में एक चार सेंटीमीटर तथा एक एक सेंटीमीटर का छेद था जिसकी वजह से उसे सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। इस ऑपरेशन में मरीज के सीने में जमा मवाद को निकालने के साथ ही दोनों छिद्रों को बंद किया गया। डॉ. सिसोदिया ने बताया कि मरीज के फेफड़े में खराबी थी, जिसे चिकित्सा विज्ञान में ब्रोंकोपल्मोनरी फिस्टुला कहते हैं। इस बीमारी के कारण मरीज के फेफड़ों और छाती की दीवार के बीच हवा लीक होती रहती है। उन्होंने बताया कि फेफड़े में छेद (न्यूमोथोरैक्स) तब होता है जब फेफड़े से हवा निकलकर फेफड़े और छाती की दीवार के बीच की जगह में भर जाती है। हवा के इस जमाव से फेफड़े पर दबाव पड़ता है, जिससे उसका फैलाव सीमित हो जाता है और व्यक्ति पूरी तरह से सांस नहीं ले पाता। उन्होंने बताया कि यह ऑपरेशन अति संवेदनशील होने के साथ रिस्की भी था। डॉ. सिसोदिया ने बताया कि ब्रज क्षेत्र में सिर्फ के.डी. हॉस्पिटल में ही इस तरह के ऑपरेशन की सुविधा है। मरीज का ऑपरेशन बहुत कम पैसे में कर उसे नई जिन्दगी दी गई है। मरीज अब स्वस्थ है तथा उसके परिजनों ने हॉस्पिटल प्रबंधन का आभार माना है। के.डी. मेडिकल कॉलेज-हॉस्पिटल एण्ड रिसर्च सेण्टर के चेयरमैन मनोज अग्रवाल, डीन और प्राचार्य डॉ. आर.के. अशोका, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. गगनदीप सिंह, विभागाध्यक्ष सर्जरी डॉ. प्रवीण अग्रवाल ने सोनपाल की सफल सर्जरी करने वाली टीम को बधाई देते हुए मरीज के स्वस्थ-सुखद जीवन की कामना की है।

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