
सासनी 27 मई । नगर पंचायत सासनी में सीवरेज एवं जल निकासी योजनाओं में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है। राज्य दिव्यांग सलाहकार बोर्ड के सदस्य सागर शर्मा की शिकायत पर हुई जांच में तत्कालीन अधिशासी अधिकारी (ईओ), जूनियर इंजीनियर (जेई) और एक लिपिक प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए हैं। जिलाधिकारी अतुल वत्स ने जांच रिपोर्ट नगरीय निकाय निदेशालय को भेज दी है, जिसके बाद शासन स्तर पर कड़ी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। शिकायतकर्ता की अर्जी पर जिलाधिकारी ने एसडीएम सासनी नीरज शर्मा, वरिष्ठ कोषाधिकारी एवं जल निगम के अधिशासी अभियंता की संयुक्त जांच समिति गठित की थी। जांच में सामने आया कि फर्म मैसर्स दुबे एंटरप्राइजेज द्वारा जमा कराई गई एफडीआर (फिक्स्ड डिपॉजिट रसीद) फर्जी थी। भारतीय स्टेट बैंक, अलीगढ़ ने लिखित रूप से स्पष्ट किया कि उक्त एफडीआर उनके बैंक द्वारा जारी ही नहीं की गई थी। जांच के दौरान माप पुस्तिकाओं में भी बड़े स्तर पर गड़बड़ी सामने आई। आगरा मुख्य मार्ग पर नाला निर्माण कार्य में कागजों पर 130 मीटर खुदाई दर्शाई गई, जबकि पाइप डालने एवं वैरीकेटिंग की लंबाई 150 मीटर से लेकर 230 मीटर तक दिखाकर फर्म को भुगतान कर दिया गया। जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में इस फर्जीवाड़े की पुष्टि की है। रिपोर्ट के अनुसार, जूनियर इंजीनियर पर आरोप है कि उन्होंने सहायक अभियंता द्वारा माप पुस्तिका में किए गए संशोधनों और कटौतियों को नजरअंदाज करते हुए पुरानी एवं अधिक मापों के आधार पर फर्म को लाखों रुपये का अतिरिक्त भुगतान कराया। साथ ही निविदा पत्रावलियों को नियम विरुद्ध अपने पास रखने, एफडीआर का सत्यापन न कराने और फर्जी मापों के आधार पर भुगतान की संस्तुति करने का भी आरोप लगाया गया है। वहीं तत्कालीन ईओ पर बिना तकनीकी एवं प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त किए संशोधित आंगणन के आधार पर भुगतान प्रक्रिया आगे बढ़ाने का आरोप है। लिपिक पर भी सहायक अभियंता द्वारा किए गए संशोधनों को भुगतान पत्रावली में शामिल न करने तथा फर्म को अनुचित लाभ पहुंचाने के आरोप लगे हैं। हालांकि शिकायतकर्ता सागर शर्मा ने जांच प्रक्रिया पर असंतोष जताते हुए कहा कि जांच समिति द्वारा तकनीकी जांच नहीं कराई गई। उन्होंने मामले की शिकायत मुख्यमंत्री से करने की बात कही है। अब शासन स्तर पर होने वाली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।


























