
हाथरस 11 जुलाई। ऑपरेशन वज्र के तहत साइबर क्राइम थाना पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। डिस्ट्रिक्ट इंटेलिजेंस पैक (DIP) की मदद से एक संदिग्ध म्यूल बैंक खाते का पता चला है, जिसका उपयोग देश के विभिन्न राज्यों में हुई साइबर ठगी की रकम को ट्रांसफर करने के लिए किया जा रहा था। पुलिस ने खाताधारक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। थाना साइबर क्राइम में तैनात उपनिरीक्षक प्रदीप कुमार द्वारा दर्ज कराई गई तहरीर के अनुसार, 9 जुलाई 2026 को डिस्ट्रिक्ट इंटेलिजेंस पैक के माध्यम से बैंक ऑफ बड़ौदा के एक करंट खाते की संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिली। जांच में पता चला कि यह खाता “श्री गणेश ऑटोमोबाइल्स” के नाम से रोहित सिंह, पुत्र ज्ञान सिंह, निवासी बाला पट्टी, हाथरस के नाम पर संचालित है। पुलिस ने जब इस खाते की एनसीआरपी (National Cyber Crime Reporting Portal) पर जांच की तो पता चला कि यह खाता देश के 10 राज्यों में दर्ज साइबर ठगी की शिकायतों से जुड़ा हुआ है। जांच में सामने आया कि करीब 4.79 करोड़ रुपये की साइबर ठगी में से 44.57 लाख रुपये सबसे पहले इसी खाते में ट्रांसफर किए गए थे, जिसके बाद रकम को आगे विभिन्न खातों में भेजा गया। साइबर पुलिस का कहना है कि विभिन्न राज्यों से ठगी की रकम का इस खाते में आना इस बात का संकेत है कि इसे म्यूल अकाउंट के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। मामले में डिस्ट्रिक्ट इंटेलिजेंस पैक की रिपोर्ट, एनसीआरपी का विवरण तथा बैंक दस्तावेजों के आधार पर खाताधारक रोहित सिंह के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस मामले की गहन जांच कर यह पता लगाने में जुटी है कि साइबर ठगी के इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं तथा ठगी की रकम किन-किन खातों में स्थानांतरित की गई।





















