Hamara Hathras

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हाथरस 25 मई । अधिक मास के उपलक्ष्य में ब्रज के द्वार हाथरस की रुई की मंडी स्थित मंदिर ठाकुर श्री कन्हैया लाल जी महाराज परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन श्रद्धा और भक्ति का विशेष वातावरण देखने को मिला। कथा व्यास हरि सुरेषाचार्य ने व्यास पीठ से प्रवचन करते हुए कहा कि जब अभिमान टूटता है तो भगवान स्वयं भक्त के द्वारपाल बन जाते हैं। उन्होंने राजा बलि और भगवान वामन अवतार का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि भगवान ने तीन पग भूमि मांगकर यह संदेश दिया कि दान में कभी अहंकार नहीं होना चाहिए। इस अवसर पर कथा व्यास ने भगवान के मत्स्य, कूर्म, वराह, नृसिंह एवं परशुराम अवतारों का भावपूर्ण एवं मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने कहा कि राजा बलि का अभिमान टूटने के बाद भगवान स्वयं उनके यहां द्वारपाल बनकर रहने लगे। कथा समापन के उपरांत श्रीमद्भागवत जी की भव्य शोभायात्रा नगर में निकाली गई, जिसका विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं द्वारा पुष्पवर्षा एवं स्वागत किया गया। वहीं यज्ञ में पूर्णाहुति के साथ भागवत कथा महोत्सव संपन्न हुआ। महोत्सव में मंदिर कमेटी के अध्यक्ष राजकुमार कोठीवाल, रमेशचंद्र शर्मा “ब्रह्मचारी”, मंदिर सेवायत पंडित चेतन मिश्र, देवेश कौशिक जी, पं. राजा “रंगीला”, कन्हैयालाल घी वाले, आलोक वार्ष्णेय, मनोज वार्ष्णेय, सौरभ मोबाइल वाले, पूर्व सभासद पवन गुप्ता तेल वाले, ठा.पवन पौरुष, बांके बिहारी वर्मा, दीपक वर्मा, व  एडवोकेट संजय दीक्षित, संजीव वर्मा आदि भक्ति सहयोग सराहनीय रहा। इस अवसर पर काफी संख्या में महिलाएं शक्ति एवं भक्तगण उपस्थित थे।

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