
अलीगढ़ 30 अप्रैल । मंगलायतन विश्वविद्यालय में “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” के तहत “शक्तिपथ : लोकतंत्र में महिलाओं का नेतृत्व” विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें वक्ताओं ने महिलाओं की भागीदारी, अधिकारों और नेतृत्व क्षमता पर विस्तार से विचार-विमर्श किया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि मधुलिका रानी ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। उन्होंने नारी शक्ति वंदन अधिनियम-2023 को महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल बताया। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं की मूल आवश्यकताओं और सुरक्षा को लेकर सरकार गंभीर है। विशिष्ट अतिथि शिव नारायण शर्मा ने कहा कि आज की नारी केवल सजावट का प्रतीक नहीं, बल्कि इतिहास बदलने की क्षमता रखती है। उन्होंने महिलाओं से अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने और लोकतांत्रिक संस्थाओं में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया। डा. पूनम रानी ने कहा कि नारी का नेतृत्व सदैव समाजहित में होता है और महिलाओं की शिक्षा ही उनके सशक्तिकरण की सबसे बड़ी कुंजी है। वहीं प्रो. गुंजन रानी ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए अत्यंत आवश्यक है और सभी धर्मों में महिलाओं के सम्मान का संदेश दिया गया है। कार्यक्रम के दौरान अधिनियम को लेकर चल रही राजनीतिक बहस पर भी चर्चा की गई। अंत में सभी प्रतिभागियों ने महिलाओं के अधिकारों और नेतृत्व को मजबूत बनाने के लिए सामूहिक प्रयास करने का संकल्प लिया।

























