
हाथरस 03 जुलाई। जिले के मक्का उत्पादक किसानों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। खुले बाजार में मक्का के दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से काफी नीचे चल रहे हैं, जिसके कारण किसानों को प्रति क्विंटल 500 से 1000 रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है। बंपर उत्पादन के बावजूद किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। मंडी के आंकड़ों के अनुसार इस सीजन में अब तक 2 लाख 17 हजार क्विंटल मक्का की आवक हो चुकी है, जबकि पिछले वर्ष 30 जून तक यह आंकड़ा केवल 1 लाख क्विंटल था। यानी इस बार मंडी में पिछले साल की तुलना में दोगुनी से अधिक मक्का पहुंच चुकी है। इसके बावजूद किसानों को बाजार में केवल 1400 से 1900 रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिल रहा है, जबकि सरकार ने मक्का का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2400 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है।
प्रशासन ने किसानों को एमएसपी का लाभ दिलाने के लिए जिले में सात मक्का क्रय केंद्र स्थापित किए हैं। हालांकि, सरकारी दर और बाजार भाव में बड़ा अंतर होने के बावजूद इन केंद्रों पर अब तक केवल 675 क्विंटल मक्का की ही खरीद हो सकी है। किसानों का कहना है कि नमी, तकनीकी प्रक्रियाओं, कड़े गुणवत्ता मानकों तथा अन्य औपचारिकताओं के कारण वे सरकारी खरीद केंद्रों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। मजबूरी में उन्हें अपनी फसल आढ़तियों को कम कीमत पर बेचनी पड़ रही है। कृषि विभाग के अनुसार इस वर्ष जिले में करीब 17 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में मक्का की खेती की गई है। अच्छी पैदावार से किसानों को बेहतर आय की उम्मीद थी, लेकिन बाजार में गिरते दामों ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। किसानों का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में उत्पादन लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है।
प्रमुख आंकड़े:
- कुल मक्का रकबा: 17 हजार हेक्टेयर
- मंडी में कुल आवक: 2,17,000 क्विंटल
- पिछले वर्ष 30 जून तक आवक: 1,00,000 क्विंटल
- सरकारी क्रय केंद्र: 7
- क्रय केंद्रों पर अब तक खरीद: 675 क्विंटल
- न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी): 2400 रुपये प्रति क्विंटल
- मंडी में वर्तमान भाव: 1400 से 1900 रुपये प्रति क्विंटल
डिप्टी आरएमओ कमला प्रसाद यादव ने बताया कि क्रय केंद्रों पर मक्का की खरीद निर्धारित मानकों के अनुसार की जा रही है और अब तक करीब 675 क्विंटल मक्का की खरीद हो चुकी है। वहीं, मंडी सचिव अनिल कुमार ने कहा कि इस वर्ष मंडी में पिछले साल की तुलना में दोगुनी से अधिक मक्का पहुंच चुकी है। उन्होंने बताया कि मक्का में नमी की समस्या जरूर है, लेकिन इसके बावजूद मंडी में खरीद प्रक्रिया लगातार जारी है।
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