
हाथरस 28 जुलाई। आगरा में बंद फर्मों, निरस्त लाइसेंस और फर्जी बिलिंग के जरिए नकली, एक्सपायरी एवं सरकारी सैंपल की दवाओं के अवैध कारोबार का बड़ा खुलासा होने के बाद हाथरस में भी खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन सतर्क हो गया है। विभाग ने जिले के थोक दवा विक्रेताओं, गोदामों और मेडिकल स्टोरों की निगरानी बढ़ाते हुए व्यापक जांच अभियान शुरू कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि जिले में किसी भी कीमत पर नकली अथवा अवैध दवाओं की बिक्री नहीं होने दी जाएगी।
हाल ही में आगरा में करीब 3.72 करोड़ रुपये मूल्य की नामी कंपनियों की नकली एवं सैंपल दवाओं के अवैध भंडारण और री-लेबलिंग का भंडाफोड़ हुआ था। जांच में सामने आया कि बंद पड़ी फर्मों और निरस्त लाइसेंसों का इस्तेमाल कर कमीशन के आधार पर फर्जी कारोबार संचालित किया जा रहा था। इस खुलासे के बाद हाथरस का औषधि विभाग भी पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है।
जिले में इससे पहले भी संदिग्ध दवाओं से जुड़े मामले सामने आ चुके हैं। सिकंदराराऊ क्षेत्र में 16 जनवरी को पुराने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में कूड़े से 34 खाली सिरप की शीशियां और 17 मार्च को सीएचसी मार्ग पर 149 खाली शीशियां बरामद हुई थीं। जांच में इनका संबंध प्रतिबंधित कोडिन श्रेणी की दवाओं से पाया गया था। औषधि विभाग की जांच की कड़ियां उत्तराखंड तक पहुंची थीं और देहरादून स्थित कंपनी के स्तर पर जांच अभी भी जारी है।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम अब जिले के सभी प्रमुख थोक दवा विक्रेताओं, गोदामों और संदिग्ध प्रतिष्ठानों की गहन जांच करेगी। इसके तहत बंद या निरस्त लाइसेंस वाली फर्मों का सत्यापन किया जाएगा ताकि उनके नाम पर फर्जी बिलिंग और अवैध कारोबार पर रोक लगाई जा सके। साथ ही रिटेल मेडिकल स्टोरों पर बिक रही दवाओं के बैच नंबर, बिल और स्टॉक का भी मिलान किया जाएगा।
प्रशासन ने सभी मेडिकल फर्मों को अपने प्रतिष्ठान एवं गोदाम के बाहर जीएसटी नंबर, ड्रग लाइसेंस नंबर और संचालक के नाम का बोर्ड अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों ने थोक और फुटकर दवा विक्रेताओं को केवल अधिकृत स्रोतों और वैध बिलों के साथ ही दवाओं की खरीद-बिक्री करने के निर्देश दिए हैं। विभाग का कहना है कि जांच के दौरान यदि कोई फर्म संदिग्ध पाई जाती है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।











