
हाथरस 28 जुलाई। राशन कार्ड धारकों के लिए आवंटित केरोसिन (मिट्टी का तेल) की कथित कालाबाजारी से जुड़े बहुचर्चित मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (कोर्ट संख्या-5) की अदालत ने आरोपी तरुण पोद्दार को राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने आरोपी की ओर से दायर दांडिक निगरानी याचिका को पोषणीय न मानते हुए निरस्त कर दिया तथा एसीजेएम कोर्ट द्वारा उसके प्रार्थना पत्र को खारिज किए जाने के आदेश को बरकरार रखा है।
मामले के अनुसार, 23 मई 2018 को तत्कालीन एसडीएम एवं क्षेत्राधिकारी के निर्देशन में आपूर्ति विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने चामड़ गेट स्थित नई धर्मशाला के सामने चौपइया वाला नौहरा के गोदामों पर छापेमारी की थी। कार्रवाई के दौरान 12 भरे हुए ड्रमों में लगभग 2,400 लीटर केरोसिन तथा 28 खाली ड्रम बरामद किए गए थे। जांच में आरोप लगाया गया कि यह केरोसिन गरीबों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत वितरित किए जाने वाले सरकारी कोटे का था, जिसे अवैध रूप से जमा कर कालाबाजारी के उद्देश्य से रखा गया था। इस मामले में पुलिस ने निक्की वार्ष्णेय, तरुण पोद्दार, नीरज चौधरी उर्फ नीरा तथा धीरज के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर विवेचना के बाद न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया था।
विचारण के दौरान आरोपी तरुण पोद्दार ने स्वयं को आरोपों से मुक्त किए जाने का प्रार्थना पत्र दाखिल करते हुए दावा किया था कि बरामद पदार्थ केरोसिन नहीं बल्कि तारपीन का तेल था और उस पर आवश्यक वस्तु अधिनियम की धाराएं लागू नहीं होतीं। हालांकि 29 नवंबर 2025 को एसीजेएम कोर्ट ने उसका आवेदन खारिज कर दिया था, जिसके विरुद्ध उसने एडीजे कोर्ट में दांडिक निगरानी याचिका दायर की।
एडीजे (कोर्ट संख्या-5) ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने, पत्रावली एवं उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद कहा कि आरोप तय करने के चरण में केवल प्रथमदृष्टया तथ्यों का परीक्षण किया जाता है। आरोपी द्वारा उठाए गए बिंदुओं पर विचार साक्ष्य के आधार पर विचारण के दौरान किया जाएगा, जहां उसे अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलेगा। अदालत ने माना कि निचली अदालत के आदेश में कोई विधिक त्रुटि या अनियमितता नहीं है। इसके साथ ही निगरानी याचिका निरस्त करते हुए मूल पत्रावली निचली अदालत को वापस भेज दी गई तथा मामले में आगे की विधिक कार्रवाई जारी रखने के निर्देश दिए गए।










