अलीगढ़ 05 अगस्त। मंगलायतन विश्वविद्यालय के फिजि योथेरेपी विभाग की शोधकर्ता डा. अन्नपूर्णा और डा. नेहा रानी ने स्वास्थ्य एवं पुनर्वास विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण शोध उपलब्धि हासिल की है। दोनों शोधकर्ताओं द्वारा विकसित एआई आधारित पुनर्वास प्रणाली के लिए भारतीय पेटेंट आवेदन दाखिल किया गया है। इस नवाचार का उद्देश्य टेंपोरोमैंडीब्यूलर जॉइंट (टीएमजे) से जुड़ी समस्याओं के उपचार और मरीजों की निगरानी को आधुनिक तकनीक के माध्यम से अधिक प्रभावी बनाना है। शोधकर्ताओं द्वारा तैयार पेटेंट का शीर्षक “एन एआई-असिस्टेड टीएमजे-स्पेसिफिक योग-बेस्ड ओरल रिहैबिलिटेशन एंड हाइजीन प्रोटोकॉल इंप्लीमेंटेड थ्रू ए कंप्यूटर-इंप्लीमेंटेड रिहैबिलिटेशन गाइडेंस एंड मॉनिटरिंग सिस्टम” है। इस प्रणाली में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, फिजियोथेरेपी और योग पद्धति का समन्वय किया गया है। कंप्यूटर आधारित यह तकनीक मरीज की दैनिक प्रगति को ट्रैक करते हुए जबड़े से संबंधित विशेष योगाभ्यास, नियंत्रित व्यायाम और मौखिक स्वच्छता के लिए डिजिटल मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की दिशा में काम करेगी। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पीके दशोरा ने कहा कि संस्थान में शोध और नवाचार को प्राथमिकता दी जा रही है। एआई तकनीक और प्राचीन योग पद्धति का यह संगम चिकित्सा एवं पुनर्वास विज्ञान में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। कुलसचिव कमांडर मनोज के. ने कहा कि शोध एवं पेटेंट से जुड़ी गतिविधियों के लिए विश्वविद्यालय की ओर से आवश्यक प्रशासनिक और ढांचागत सहयोग लगातार दिया जा रहा है। परीक्षा नियंत्रक प्रो. दिनेश शर्मा ने शोध की उपयोगिता को अकादमिक गुणवत्ता का महत्वपूर्ण आधार बताया, जबकि डीन रिसर्च प्रो. रविकांत ने कहा कि डिजिटल हेल्थ और टेली-रिहैबिलिटेशन के बढ़ते दौर में यह एआई आधारित प्रणाली नई दिशा देने की क्षमता रखती है।
क्या है टीएमजे विकार
टेंपोरोमैंडीब्यूलर जॉइंट यानी टीएमजे वह जोड़ है, जो निचले जबड़े को खोपड़ी से जोड़ता है। इसमें समस्या होने पर मुंह खोलने, चबाने और बोलने में परेशानी के साथ चेहरे तथा गर्दन में दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। प्रस्तावित एआई प्रणाली मरीज को घर पर ही व्यायाम और ओरल हाइजीन संबंधी डिजिटल मार्गदर्शन देने के साथ उसकी प्रगति की निगरानी में मदद करेगी। इससे भविष्य में टेली-रिहैबिलिटेशन और डिजिटल हेल्थ सेवाओं को मजबूती मिलने की उम्मीद है।












