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हाथरस 02 जून । ग्राम पंचायतों में कार्यरत पंचायत सहायकों ने कम मानदेय और बढ़ते कार्यभार को लेकर नाराजगी जताते हुए सरकार से अपनी मांगों पर विचार करने की अपील की है। पंचायत सहायकों का कहना है कि वर्तमान में उन्हें मात्र 6000 रुपये मासिक मानदेय दिया जा रहा है, जो एक कुशल मजदूर की मजदूरी से भी कम है। इतने कम मानदेय में परिवार का भरण-पोषण करना अत्यंत कठिन हो गया है। पंचायत सहायकों के अनुसार उनसे पंचायत स्तर के कार्यों के अलावा ब्लॉक, तहसील एवं विकास भवन पर भी समय-समय पर ड्यूटी लगाई जाती है। इसके साथ ही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), जनगणना, फार्मर रजिस्ट्री, आयुष्मान कार्ड, फैमिली आईडी तथा विभिन्न विभागों के अन्य कार्य भी कराए जाते हैं। इसके बावजूद उन्हें अतिरिक्त भुगतान नहीं दिया जाता। पंचायत सहायकों का आरोप है कि 6000 रुपये के मानदेय में भी उपस्थिति के आधार पर कटौती कर दी जाती है। यदि कोई पंचायत सहायक कार्यों के लिए अलग भुगतान या मानदेय वृद्धि की बात करता है तो उसे सेवा समाप्ति की चेतावनी दिए जाने का डर दिखाया जाता है। पंचायत सहायकों ने सरकार के समक्ष अपनी प्रमुख मांगें रखते हुए कहा है कि उनका मासिक मानदेय 6000 रुपये से बढ़ाकर 30000 रुपये किया जाए, संविदा आधारित अनुबंध व्यवस्था समाप्त की जाए तथा पंचायत सहायकों को स्थायी कर्मचारी का दर्जा प्रदान किया जाए। पंचायत सहायकों का कहना है कि ग्राम पंचायतों में डिजिटल सेवाओं और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है, इसलिए उनके हितों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। जबतक हमारी मांगे पूरी नहीं होती ज़ब तक हम अनिश्चितकालीन हड़ताल पर रहेंगे, हम लखनऊ जाकर धरना प्रदर्शन भी करेंगे। इस मौके पर पंचायत सहायक कुलदीप गौतम, मौ जुनैद, प्रगति कुमारी, देवेंद्र प्रताप सिंह आदि थे।

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