
हाथरस 02 जुलाई । खरीफ सीजन के तहत धान एवं अन्य फसलों की बुआई शुरू होने के साथ ही किसानों को पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराने और कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए जिला प्रशासन सक्रिय हो गया है। जिलाधिकारी के निर्देश पर गठित उपजिलाधिकारी एवं जिला कृषि अधिकारी की संयुक्त टीम ने गुरुवार को जनपद की सभी तहसीलों में उर्वरक विक्रेताओं के प्रतिष्ठानों का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अनियमितताएं पाए जाने पर मयंक फर्टिलाइजर (कछपुरा), मां चंद्रावली (सादाबाद), राजीव ट्रेडर्स (सादाबाद), भूमिधर ट्रेडर्स (सासनी) तथा विनय फर्टिलाइजर (दरियापुर) सहित कई प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किए गए। जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि जनपद में किसानों की मांग को देखते हुए वर्तमान में 22,332 मीट्रिक टन यूरिया एवं 6,700 मीट्रिक टन डीएपी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त पीसीएफ बफर गोदाम में प्री-पोजीशनिंग के तहत 674 मीट्रिक टन यूरिया तथा 2,100 मीट्रिक टन डीएपी सुरक्षित रखा गया है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर तत्काल उपलब्ध कराया जा सके। प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि यदि कोई उर्वरक विक्रेता निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत वसूलता है या यूरिया एवं डीएपी के साथ अन्य उत्पादों की जबरन टैगिंग करता है, तो इसकी शिकायत तत्काल जिला कृषि अधिकारी कार्यालय के कंट्रोल रूम के मोबाइल नंबर 8126556290 एवं 9410290381 पर करें। शिकायत मिलने पर संबंधित विक्रेता के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
कृषकों से उर्वरक खरीदते समय आधार कार्ड, भूमि की खतौनी तथा फार्मर आईडी की छायाप्रति साथ लेकर जाने की अपील की गई है। वहीं सभी उर्वरक विक्रेताओं को स्टॉक बोर्ड पर उपलब्ध स्टॉक एवं निर्धारित दरें प्रदर्शित करने, स्टॉक एवं बिक्री रजिस्टर प्रतिदिन अद्यतन रखने तथा पीओएस मशीन के माध्यम से ही उर्वरकों की बिक्री सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि शासन द्वारा खरीफ सीजन में प्रति हेक्टेयर अधिकतम 7 बोरी यूरिया एवं 5 बोरी डीएपी उपलब्ध कराने की व्यवस्था निर्धारित की गई है। किसानों की मांग के अनुसार ही नैनो यूरिया, नैनो डीएपी, जिंक, जाइम, सल्फर एवं माइक्रोन्यूट्रिएंट जैसे उत्पाद उपलब्ध कराए जाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि यूरिया एवं डीएपी के साथ अन्य उत्पादों की जबरन टैगिंग अथवा निर्धारित दर से अधिक मूल्य पर बिक्री करने वाले उर्वरक विक्रेताओं के विरुद्ध उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी।


























