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हाथरस 02 अक्टूबर। तृतीय प्रांतीय एवं 115वें मेला श्री दाऊजी महाराज के अवसर पर एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक ह्यूमन राइट्स (एडीएचआर) के तत्वावधान में मेला पंडाल में “वर्तमान परिस्थितियों में मानव अधिकारों के संरक्षण व संवर्धन में चुनौतियां” विषय पर मानव अधिकार जागरूकता सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में मानव अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ सामाजिक, संवैधानिक, महिला, बाल एवं डिजिटल अधिकारों से जुड़ी चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों ने भगवान गणेश की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित कर किया। सम्मेलन में सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों, विद्यार्थियों, अधिवक्ताओं एवं विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने सहभागिता की। मुख्य अतिथि दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष डॉ. ओम प्रकाश व्यास ने कहा कि मानव अधिकार वे मूल अधिकार हैं, जो प्रत्येक व्यक्ति को केवल मनुष्य होने के नाते प्राप्त होते हैं। व्यक्ति की गरिमा, स्वतंत्रता, समानता, सुरक्षा एवं सम्मानपूर्ण जीवन इन अधिकारों की आधारशिला हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान के मौलिक अधिकार, राज्य के नीति-निर्देशक तत्व और न्यायपालिका द्वारा विकसित संवैधानिक सिद्धांत मानव गरिमा एवं अधिकारों की रक्षा का महत्वपूर्ण आधार हैं। उन्होंने कहा कि मानव अधिकार तभी प्रभावी होते हैं, जब व्यक्ति को अपनी शिकायत रखने, निष्पक्ष प्रक्रिया प्राप्त करने और न्याय पाने का वास्तविक अवसर मिले। गरीब, अशिक्षित एवं सामाजिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों के लिए प्रशासनिक व्यवस्था, पुलिस, न्यायालय और कानूनी प्रक्रियाओं तक पहुंच कई बार कठिन हो सकती है। ऐसी स्थिति में जागरूकता और संवेदनशील व्यवस्था की आवश्यकता और बढ़ जाती है। उन्होंने एडीएचआर की टीम को सफल आयोजन के लिए बधाई दी।

एडीएचआर महिला प्रकोष्ठ की राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) सरोज व्यास ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान, शिक्षा, स्वास्थ्य, संपत्ति में अधिकार, कार्यस्थल पर गरिमा तथा निर्णय लेने में समान अवसर मानव अधिकारों का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उन्होंने घरेलू हिंसा, दहेज, यौन उत्पीड़न, साइबर उत्पीड़न, बाल विवाह एवं आर्थिक निर्भरता जैसी चुनौतियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि एडीएचआर जागरूकता के साथ युवा सशक्तिकरण, कौशल विकास और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में भी कार्य करेगा। उन्होंने बताया कि विनसम एक्सप्रेस के साथ मिलकर युवाओं एवं प्रतिभाशाली लोगों के लिए कंपनियों में भर्ती और करियर अवसरों से संबंधित अभियान चलाने की दिशा में पहल की जाएगी। सम्मेलन संयोजक एवं एडीएचआर के राष्ट्रीय महासचिव प्रवीन वार्ष्णेय ने कहा कि डिजिटल क्रांति और सोशल मीडिया ने मानव अधिकारों के सामने नई चुनौतियां खड़ी की हैं। इंटरनेट ने सूचना और अभिव्यक्ति के अवसरों को व्यापक बनाया है, लेकिन साइबर अपराध, ऑनलाइन धोखाधड़ी, व्यक्तिगत जानकारी का दुरुपयोग, साइबर बुलिंग, फर्जी सामग्री एवं डिजिटल पहचान से जुड़े खतरे निजता, प्रतिष्ठा और सुरक्षा को प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में मानव अधिकार जागरूकता में डिजिटल राइट्स एवं साइबर जागरूकता को भी शामिल करना आवश्यक है। सम्मेलन समन्वयक एवं जिला समाज कल्याण अधिकारी डॉ. सरिता सिंह ने कहा कि यह सम्मेलन युवाओं में जागरूकता पैदा करने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा। युवाओं को अपने अधिकारों के साथ-साथ संवैधानिक कर्तव्यों के प्रति भी जागरूक होना चाहिए।

राष्ट्रीय प्रवक्ता देवेन्द्र गोयल ने समाज में आ रहे बदलावों एवं सम्मेलन की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए इसकी महत्ता पर प्रकाश डाला। जिलाध्यक्ष कमलकांत दोवराबाल ने कहा कि जागरूक व्यक्ति अपने अधिकारों के संरक्षण के साथ समाज के अन्य लोगों को भी जागरूक करता है। जागरूक नागरिकों से ही जागरूक समाज और सशक्त राष्ट्र का निर्माण होता है। सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष मोहनलाल अग्रवाल ने कहा कि जातिवाद एवं सामाजिक विभाजन समाज के सामने महत्वपूर्ण चुनौतियां हैं। सामाजिक दूरियों को कम करने, आपसी भाईचारा और सामाजिक समरसता बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने सभी अतिथियों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। सम्मेलन में प्रेम रघु नर्सिंग कॉलेज एवं हॉस्पिटल तथा आरपीएम लॉ कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने भी मानव अधिकारों के विषय पर अपने विचार रखे। विद्यार्थियों की सहभागिता की सराहना करते हुए उनके प्राचार्यों, प्रोफेसरों एवं समस्त स्टाफ के सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया गया। वक्ताओं ने कहा कि मानव अधिकार केवल अधिकारों की सूची नहीं हैं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति के सम्मान, स्वतंत्रता, समानता और गरिमा के साथ जीवन जीने से जुड़े हैं। वर्तमान परिस्थितियों में इनके संरक्षण एवं संवर्धन के लिए जनजागरूकता, संवेदनशीलता, संवैधानिक मूल्यों की समझ और नागरिक जिम्मेदारी को मजबूत करना आवश्यक है। सम्मेलन में शैलेन्द्र सांवलिया, अनिल अग्रवाल, डॉ. पी.पी. सिंह, राजेश वार्ष्णेय, रवि गुप्ता, मुरारी चौधरी, उद्धव कृष्ण शर्मा, उपवेश कौशिक, नरेन्द्र कुमार पचौरी, शिवशंकर गुलाठी, अनिल वार्ष्णेय, सुरेन्द्र वार्ष्णेय, राजीव वार्ष्णेय, रवि वार्ष्णेय, राजेंद्र नाथ चतुर्वेदी, सचिन अग्रवाल, तरुण पंकज, मनोज वार्ष्णेय, निधि शर्मा, संजय कुमार शर्मा, दीपक शर्मा, नरेन्द्र शर्मा, मनीष चांदगोठिया, राहुल गर्ग, रेनू पचौरी, डॉ. सतेन्द्र सिंह, निधि सचार्य, डौली सिंह, रीता शर्मा, कृष्ण कांत, सुनील विजय, निर्मल सक्सेना, संदीप कोहली, ललित नारायण बिड़ला, विपुल माहेश्वरी, बसंत माहेश्वरी, मनोज कुमार गुप्ता, आकाश गुप्ता, डॉ. विकास कुमार, गगन गुप्ता आदि मौजूद रहे। सम्मेलन में सैकड़ों छात्र-छात्राओं एवं शहर के नागरिकों ने सहभागिता की।

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