
हाथरस 25 जुलाई। हाथरस बाईपास स्थित चर्चित कैलाश ढाबा गैंगवार मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय ने कुख्यात अपराधी मोना ठाकुर की जमानत याचिका खारिज कर दी है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश विनय कुमार तृतीय की अदालत ने अभियुक्त के लंबे आपराधिक इतिहास और मामले की गंभीरता को देखते हुए उसे जमानत देने से साफ इनकार कर दिया। जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान मोना ठाकुर के अधिवक्ता ने अदालत में दलील दी कि उनके मुवक्किल को मामले में झूठा फंसाया गया है और पुलिस की कार्रवाई तथ्यों पर आधारित नहीं है। वहीं, शासन की ओर से पैरवी कर रहे एडीजीसी ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए अभियुक्त का विस्तृत आपराधिक रिकॉर्ड अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया। अभियोजन पक्ष ने बताया कि मोना ठाकुर के खिलाफ 22 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। अदालत ने इस लंबे आपराधिक इतिहास को गंभीर मानते हुए कहा कि अभियुक्त की अपराध में सक्रिय भूमिका प्रथम दृष्टया सामने आती है। ऐसे संगीन मामले में जमानत देने का कोई पर्याप्त आधार नहीं बनता, इसलिए जमानत याचिका निरस्त की जाती है।
सरेआम गैंगवार से दहल उठा था हाईवे
गौरतलब है कि 18 जून को हाथरस बाईपास स्थित कैलाश ढाबा के पास मोना ठाकुर और विरोधी गैंग के बीच वर्चस्व की लड़ाई और पुरानी रंजिश को लेकर दिनदहाड़े ताबड़तोड़ फायरिंग हुई थी। स्कॉर्पियो, वैगनआर कार और बुलेट पर सवार बदमाशों ने एक-दूसरे पर जान से मारने की नीयत से गोलियां चलाई थीं। घटना के दौरान हाईवे पर अफरा-तफरी मच गई थी और ढाबों पर मौजूद लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे थे। घटना के बाद पुलिस ने 3 जुलाई को मुठभेड़ के दौरान मोना ठाकुर को गिरफ्तार कर लिया था। इस मामले में संदीप, सूर्या, अनुज और अंकित समेत चार अन्य नामजद एवं प्रकाश में आए आरोपी अभी भी फरार हैं। पुलिस के अनुसार, फरार आरोपी लगातार गिरफ्तारी से बच रहे हैं और उनके सरेंडर की भी संभावनाएं जताई जा रही हैं।










