सादाबाद 15 जून। आज उत्तर प्रदेश दस्तावेज लेखक संघ के आह्वान पर दस्तावेज लेखकों, स्टांप वेंडरों और अधिवक्ताओं ने ई-रजिस्ट्री व्यवस्था के विरोध में कार्य बहिष्कार किया। इस दौरान रजिस्ट्री संबंधी सभी कार्य प्रभावित रहे। प्रदर्शनकारियों ने उपजिलाधिकारी मनीष चौधरी को मुख्यमंत्री और शासन के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा, जिसमें नई व्यवस्था को तत्काल वापस लेने की मांग की गई।
ज्ञापन में कहा गया है कि प्रदेश सरकार की प्रस्तावित ई-पंजीकरण व्यवस्था में निजी संस्थाओं को शामिल करने की योजना से हजारों दस्तावेज लेखकों, कंप्यूटर ऑपरेटरों, स्टांप वेंडरों और अधिवक्ताओं के सामने रोजगार का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। उनका तर्क है कि वर्षों से इस कार्य से जुड़े लोगों की आजीविका पर सीधा असर पड़ेगा, जिससे बड़ी संख्या में परिवार बेरोजगारी का सामना करने को मजबूर होंगे।प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि निबंधन कार्य में निजी संस्थाओं की भागीदारी बढ़ाने का निर्णय जनहित और अधिवक्ताओं के हितों के विपरीत है। उन्होंने सरकार से इस व्यवस्था को तत्काल निरस्त करने और रजिस्ट्री प्रक्रिया को पूर्व की तरह संचालित करने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी गई कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। संघ के पदाधिकारियों ने जानकारी दी कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में दस्तावेज लेखक, अधिवक्ता और स्टांप वेंडर ई-रजिस्ट्री व्यवस्था के विरोध में धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। कई स्थानों पर रजिस्ट्री कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन कर कार्य का बहिष्कार किया जा रहा है। उनका मानना है कि सरकार को किसी भी नई व्यवस्था को लागू करने से पहले उससे प्रभावित होने वाले वर्गों की राय अवश्य लेनी चाहिए। स्थानीय दस्तावेज लेखक संघ के अध्यक्ष राजकुमार दीक्षित के नेतृत्व में यह प्रदर्शन आयोजित किया गया। इसमें पूर्व प्रादेशिक लेखा परीक्षक श्याम सुंदर गिरी, अधिवक्ता सुरेश चंद्र कुशवाहा, अशोक कुमार, मोहर सिंह, जोगेंद्र सिंह, रामदास, मानू जायसवाल सहित बड़ी संख्या में दस्तावेज लेखक, स्टांप वेंडर और अधिवक्ता मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में ई-पंजीकरण व्यवस्था को वापस लेने और रोजगार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग उठाई।























