सिकंदराराऊ (हसायन) 21 अप्रैल । क्षेत्र के गांव जैतपुर स्थित दिव्य योग कला सत्संग मंदिर परिसर में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन किया जा रहा है। मंगलवार, 21 अप्रैल को कथा के द्वितीय दिवस पर आचार्य श्री श्री 108 कलाधर जी महाराज ने श्रीमद्भागवत के महात्म्य पर प्रकाश डालते हुए भक्ति, ज्ञान और वैराग्य की त्रिवेणी प्रवाहित की। कथा के दौरान बड़ी संख्या में मौजूद श्रद्धालुओं ने भक्ति रस का आनंद लिया। आचार्य कलाधर जी महाराज ने कथा का मार्मिक वर्णन करते हुए कहा कि भागवत कथा साक्षात् कल्पवृक्ष के समान है। जो मनुष्य इस कथा रूपी अमृत का पान करता है, वह संसार रूपी भवसागर से सहज ही पार हो जाता है। उन्होंने भक्ति प्रहलाद के प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया कि प्रहलाद ने अपनी अटूट तपस्या और भक्ति से भगवान को प्राप्त किया, जो यह सिद्ध करता है कि ईश्वर केवल प्रेम और भक्ति के भूखे हैं। कथा व्यास ने वामन अवतार और राजा बलि के प्रसंग को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि जब भी कोई मनुष्य अच्छा कार्य करता है, तो तमाम बुराइयां उसे रोकने का प्रयास करती हैं। राजा बलि द्वारा दान दिए जाने के समय शुक्राचार्य ने बाधा डालने की कोशिश की, लेकिन भगवान वामन ने अपनी लीला से राजा बलि के दान को स्वीकार किया। दो पग में तीनों लोक नापने के बाद जब प्रभु ने तीसरे पग की जगह पूछी, तो दानवीर बलि ने अपना शीश झुका दिया। भगवान ने प्रसन्न होकर बलि को वरदान दिया।
महाराज जी ने माता अनुसूया के पतिव्रत धर्म की महिमा बताते हुए कहा कि उन्होंने अपनी शक्ति से त्रिदेवों को बाल स्वरूप प्रदान कर दिया। इसके साथ ही समुद्र मंथन की कथा का भी मार्मिक व्याख्यान किया गया। कथा के अंत में श्रीमद्भागवत भगवान की आरती उतारी गई और भक्तों को प्रसाद वितरित किया गया। इस धार्मिक आयोजन में मुख्य रूप से नीरज शर्मा, विपिन शर्मा, आर.पी. शर्मा, राजकुमार शर्मा, सत्यपाल सिंह, सतेन्द्र सिंह (सेवानिवृत्त नेत्र परीक्षण अधिकारी), महीपाल सिंह, ऋषि कुमार, रुद्र प्रताप सिंह और मनोज कुमार जादौन सहित बड़ी संख्या में श्रोता उपस्थित रहे।
























