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ई दिल्ली 12 मई । पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से पेट्रोल-डीजल का संयमित उपयोग करने, सोने की खरीद को एक वर्ष तक टालने और अनावश्यक विदेश यात्राओं से बचने की अपील का व्यापक आर्थिक प्रभाव सामने आया है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि इस अपील पर व्यापक स्तर पर अमल होता है, तो भारत एक वर्ष में लगभग 59.2 अरब अमेरिकी डॉलर (करीब 5.6 लाख करोड़ रुपये) की विदेशी मुद्रा बचा सकता है। यह अनुमान वित्त वर्ष 2025-26 में कच्चे तेल, सोना, खाद्य तेल, उर्वरक आयात तथा विदेश यात्रा पर हुए व्यय के विश्लेषण पर आधारित है।

कच्चे तेल से सबसे अधिक बचत की संभावना

भारत ने वर्ष 2025-26 में लगभग 135 अरब डॉलर का कच्चा तेल आयात किया। यदि ईंधन की खपत में 20 प्रतिशत की कमी लाई जाती है, तो करीब 27 अरब डॉलर की बचत संभव है। सरकार का मानना है कि खपत में कमी से मांग का दबाव घटेगा, जिससे कीमतों और आयात बिल दोनों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

सोने की खरीद घटने से 7.2 अरब डॉलर की बचत

भारत ने पिछले वित्त वर्ष में 72 अरब डॉलर का सोना आयात किया। यदि सोने की खरीद में 10 प्रतिशत की कमी आती है, तो लगभग 7.2 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा बचाई जा सकती है। हालांकि भारत में शादी-विवाह, सांस्कृतिक परंपराओं और निवेश के सुरक्षित विकल्प के रूप में सोने की मजबूत मांग के कारण इसमें बड़ी गिरावट की संभावना सीमित मानी जा रही है।

अन्य क्षेत्रों में संभावित बचत

  • खाद्य तेल आयात में 10 प्रतिशत कमी से 1.95 अरब डॉलर की बचत
  • उर्वरक आयात में 50 प्रतिशत कमी से 7.3 अरब डॉलर की बचत
  • विदेश यात्राओं पर होने वाले 15.8 अरब डॉलर के खर्च में कटौती से उतनी ही बचत

कुल संभावित बचत: 59.2 अरब डॉलर

श्रेणी आयात/खर्च (अरब डॉलर) संभावित कटौती अनुमानित बचत (अरब डॉलर)
कच्चा तेल 135.0 20% 27.0
सोना 72.0 10% 7.2
खाद्य तेल 19.5 10% 1.95
उर्वरक 14.5 50% 7.3
विदेशी यात्रा 15.8 100% 15.8
कुल 59.2

बढ़ता सोना आयात चिंता का विषय

वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का सोना आयात 24 प्रतिशत बढ़कर 72 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जिससे देश का व्यापार घाटा बढ़कर 333.2 अरब डॉलर हो गया। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सोने के आयात में यही रफ्तार बनी रही, तो चालू खाता घाटा 1.3 प्रतिशत से अधिक हो सकता है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि देशवासी ऊर्जा, आयातित वस्तुओं और विदेश यात्रा पर संयम बरतें, तो न केवल विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत होगा बल्कि महंगाई और चालू खाता घाटे पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

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