
नई दिल्ली 15 जनवरी । देश में शराब पीने की बढ़ती आदत अब गंभीर स्वास्थ्य संकट बनती जा रही है। लिवर से जुड़ी बीमारियों के हर दूसरे मरीज में शराब की लत पाई जा रही है। कई शोधों के अनुसार, पिछले 20 वर्षों में शराब के कारण लिवर सिरोसिस के मरीज दोगुने हो गए हैं। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के अध्ययन के अनुसार, कुल मरीजों में से करीब 43 फीसदी ऐसे हैं जिनका लिवर केवल शराब के अत्यधिक सेवन से खराब हुआ। AIIMS के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. शालीमार के अनुसार, 25 से 45 वर्ष की आयु के लोगों में लिवर सिरोसिस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। शराब पीने की आदत के कारण कई मरीज गंभीर अवस्था में अस्पताल पहुंच रहे हैं। पहले इसे उम्रदराज लोगों की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब युवाओं में भी इसका खतरा बढ़ा है, खासकर जो कम उम्र में ही शराब पीना शुरू करते हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि शराब पीने की आदत अब स्कूल जाने वाले बच्चों तक भी पहुंच रही है। ऐसे परिवारों में जहां शराब पीना आम है, बच्चों में कम उम्र में ही इसकी लत दिखाई दे रही है, जो भविष्य के लिए गंभीर खतरा है। अधिक मात्रा में शराब पीने से लिवर की कोशिकाओं को गंभीर नुकसान होता है। लिवर में सूजन (हैपेटाइटिस), फैटी लिवर और अंततः लिवर सिरोसिस जैसी गंभीर स्थिति पैदा हो जाती है। डॉ. शालीमार के अनुसार, बीयर या हल्की शराब भी सुरक्षित नहीं है; अधिक मात्रा में पीने से लिवर को उतना ही नुकसान होता है।
देशभर के आंकड़े
देशभर के 41,432 मरीजों पर आधारित अध्ययन में पाया गया कि 43.2% मरीजों में सिरोसिस का कारण शराब था। 11.5% हेपेटाइटिस बी से प्रभावित थे। 6.2% हेपेटाइटिस सी से पीड़ित थे। 14.4% नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर या अन्य कारणों से बीमार थे। 2005 से 2022 के बीच शराब से जुड़े लिवर सिरोसिस के मामले तेजी से बढ़े, जबकि वायरल हेपेटाइटिस के कारण होने वाले मामले कम हुए।
विशेषज्ञों की सलाह
डॉक्टरों के अनुसार, समय रहते शराब का सेवन कम या बंद कर देना लिवर को गंभीर नुकसान से बचा सकता है। इसके साथ ही जागरूकता, सही जीवनशैली और समय पर जांच ही इस बढ़ते खतरे से बचाव का तरीका हैं।


























