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सिकंदराराऊ 07 मई । न्यायालय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम), हाथरस ने थाना सिकंदराराऊ के प्रभारी निरीक्षक (एसएचओ) की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए उनके विरुद्ध प्रकीर्ण वाद दर्ज करने के आदेश दिए हैं। न्यायालय ने यह सख्त कदम बार-बार आदेश देने के बावजूद संतोषजनक आख्या प्रस्तुत न करने और कोर्ट में उपस्थित न होने पर उठाया है। साथ ही, कोर्ट ने एसएचओ को 15 मई के लिए सम्मन जारी किया है। प्रकरण वर्ष 2018 का है, जब सिकंदराराऊ निवासी नारंगी देवी ने भ्रूण हत्या, मारपीट और जान से मारने की धमकी जैसी गंभीर धाराओं में कोतवाली सिकंदराराऊ में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद भी जब पुलिस ने वादी को विवेचना की स्थिति से अवगत नहीं कराया, तो पीड़िता ने न्यायालय की शरण ली। न्यायालय द्वारा मांगी गई आख्या पर एसएचओ ने जवाब दिया कि आरोप पत्र और पूरक आरोप पत्र वर्ष 2018 व 2019 में ही न्यायालय भेजे जा चुके हैं। हालांकि, वादी का दावा है कि कोर्ट में ऐसा कोई आरोप पत्र दाखिल ही नहीं हुआ है। पुलिस और वादी के विरोधाभासी बयानों पर न्यायालय ने 17 अप्रैल 2026 को एसएचओ से विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी। समय मांगने पर कोर्ट ने सात दिन की मोहलत भी दी, लेकिन न तो आख्या आई और न ही कारण बताओ नोटिस का जवाब दिया गया। सीजेएम कोर्ट ने पुलिस की इस लापरवाही पर नाराजगी जताते हुए टिप्पणी की कि पुलिस के रवैये के कारण 8 साल पुराने मामले में पीड़िता को न्याय मिलने में बाधा आ रही है। इस आदेश के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।

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