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सिकन्दराराऊ (हसायन) 11 जुलाई। कोतवाली परिसर में अंग्रेजों के जमाने की पुरानी प्राचीन इमारतों की नीलामी प्रक्रिया शुरू की गई। नीलामी प्रक्रिया के दौरान दो खपरैल वाली आरक्षी बैरक और तीन कोठरियों की सफलतापूर्वक नीलामी हुई। जबकि कोतवाली के पीछे बने आठ आरक्षी कमरों की बोली नहीं लग पाई। नीलामी प्रक्रिया की शुरुआत तहसील स्तरीय प्रशासनिक अधिकारी उपजिलाधिकारी एसडीएम सिकन्द्राराऊ धर्मेन्द्र सिंह चौहान की अध्यक्षता में हुई।लोक निर्माण विभाग पी.डब्ल्यू.डी. के द्वारा कोतवाली परिसर में दांए व बांए स्थापित दो आरक्षी बैरक और तीन कोठरियों के लिए एक लाख सत्तर हजार रुपये की धनराशि निर्धारित की गई थी। नीलामी के दौरान बुलंदशहर के खुर्जा निवासी अशरफ पुत्र रहीश अहमद ने बाईं और दाईं बिल्डिंग के लिए क्रमशः एक लाख नब्बे हजार और एक लाख तिरासी हजार रुपये की बोली लगाई।इस प्रकार, कुल तीन लाख तिहत्तर हजार रुपये में दो आरक्षी खपरैल वाली बैरक और तीन खपरैल वाली कोठरियां नीलाम हुईं। हालांकि,कोतवाली परिसर के पीछे बने आठ आरक्षी कमरों की नीलामी नहीं हो सकी। इन कमरों के लिए तीन लाख पैंसठ हजार रुपये की निर्धारित कीमत रखी गई थी। नीलामी में शामिल हुए लोगों ने इस कीमत को मौके पर मौजूद मलबे के मूल्य से भी अधिक बताया,जिसके कारण किसी ने बोली नहीं लगाई। बोली लगाने वाले लोगों ने पुलिस और तहसील स्तरीय प्रशासनिक अधिकारियों से कहा कि आठ आरक्षी कमरों की निर्धारित कीमत तीन लाख पैंसठ हजार रुपये मौके पर मौजूद आरक्षी भवन में लगे मलबे से भी ज्यादा है। इस कारण वे बोली लगाने से कतराते दिखे।नीलामी प्रक्रिया पूरी होने के बाद, नीलाम हुई बैरकों और कोठरियों के लिए जमानत धरोहर राशि के रूप में सैंतालीस हजार पांच सौ और सैंतालीस हजार सात सौ पचास रुपये राजस्व कोष में जमा कराए गए हैं।

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