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सासनी 24 सितम्बर। श्री 1008 पद्म प्रभु दिगंबर जैन मंदिर, सासनी में दसलक्षण धर्म महापर्व श्रद्धा, भक्ति एवं उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इसी धार्मिक श्रृंखला के अंतर्गत उत्तम त्याग धर्म के अवसर पर तीर्थधाम मंगलायतन से पधारे पंडित सुधीर शास्त्री ने मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं को उत्तम त्याग धर्म के आध्यात्मिक एवं व्यावहारिक स्वरूप पर विस्तार से प्रवचन दिए। उनके प्रवचन सुनने के लिए बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रद्धालु मंदिर परिसर में मौजूद रहे। पंडित सुधीर शास्त्री ने कहा कि त्याग केवल वस्तुओं को छोड़ देने का नाम नहीं है, बल्कि अपने भीतर के विकारों, आसक्ति, लोभ, क्रोध, मान, माया और मोह का त्याग करना ही वास्तविक उत्तम त्याग है। उन्होंने कहा कि मनुष्य जब बाहरी वस्तुओं के साथ अपने अंदर की बुराइयों और कषायों का त्याग करता है, तभी उसका जीवन वास्तविक अर्थों में धर्ममय बनता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आत्मचिंतन करते हुए जीवन में संयम, संतोष और परोपकार की भावना अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि संसार में रहते हुए मनुष्य अनेक वस्तुओं और संबंधों के प्रति आसक्त हो जाता है, ऐसे में उत्तम त्याग धर्म आवश्यकताओं की पूर्ति करते हुए संग्रह और मोह से दूर रहने की प्रेरणा देता है। व्यक्ति अपनी सामर्थ्य के अनुसार धन, वस्तु, समय, सेवा और सद्भावना का सदुपयोग कर समाज एवं मानवता के हित में योगदान दे सकता है। प्रवचन के दौरान मंदिर परिसर भक्तिमय एवं आध्यात्मिक वातावरण से सराबोर रहा। श्रद्धालुओं ने शास्त्री जी के विचारों को एकाग्रता से सुना और धर्म के सिद्धांतों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लिया। इस अवसर पर जैन समाज के महामंत्री अंजय कुमार जैन, अतुल कुमार जैन, श्याम सुंदर जैन, राहुल जैन, अम्बुज जैन, अक्षत जैन, शोभित जैन, विनय जैन, मनोज जैन, अभिषेक जैन, अरिहंत जैन, वैभव जैन, राजेंद्र जैन, अंकुर जैन, कमल जैन, संजू जैन सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग मौजूद रहे। महिलाओं ने भी धार्मिक कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक सहभागिता की। दसलक्षण धर्म महापर्व के दौरान मंदिर में प्रतिदिन आयोजित हो रहे धार्मिक अनुष्ठानों, पूजन एवं आध्यात्मिक कार्यक्रमों से जैन समाज में धर्म और आध्यात्मिक चेतना का माहौल बना हुआ है।

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