
लखनऊ 17 अगस्त। उत्तर प्रदेश सरकार ने एनालॉग डेयरी उत्पादों जैसे एनालॉग पनीर, घी, खोया, क्रीम और छेना के निर्माण, भंडारण और खुले में बिक्री पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए हैं। सरकार के आदेश के अनुसार, शुद्ध दूध से बने उत्पादों के नाम पर बिना स्पष्ट जानकारी दिए एनालॉग उत्पादों की बिक्री को उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य से खिलवाड़ माना जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित प्रतिष्ठान का खाद्य लाइसेंस निलंबित करने, उत्पादों को जब्त कर नष्ट करने और दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की कार्रवाई की जाएगी। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने पनीर, घी, खोया और क्रीम समेत अन्य दुग्ध उत्पादों में रिफाइंड तेल, विजातीय वसा तथा हानिकारक रसायनों के इस्तेमाल पर सख्ती शुरू कर दी है। विभाग की ओर से स्पष्ट किया गया है कि किसी डेयरी या दुग्ध उत्पाद निर्माण एवं प्रसंस्करण इकाई में विजातीय वसा अथवा हानिकारक रसायन पाए जाने पर वहां मौजूद सभी दुग्ध उत्पादों को जब्त कर नष्ट कराया जाएगा और निर्माण कार्य तत्काल बंद कराया जाएगा।
जनस्वास्थ्य के लिए हानिकारक रसायनों का इस्तेमाल पाए जाने पर संबंधित संचालक के खिलाफ पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी। साथ ही प्रतिष्ठान का खाद्य लाइसेंस एवं पंजीकरण तत्काल निलंबित किया जाएगा। जिस ब्रांड के उत्पाद में मिलावट की पुष्टि होगी, उसकी बिक्री पर पूरे प्रदेश में प्रतिबंध लगाया जा सकता है। वहीं उत्तर प्रदेश के बाहर निर्मित दुग्ध उत्पादों में भी हानिकारक रसायन या विजातीय वसा पाए जाने पर संबंधित ब्रांड की प्रदेशभर में बिक्री पर रोक लागू की जाएगी। सरकार ने मिलावटी और नकली डेयरी उत्पादों के खिलाफ प्रदेशभर में लगातार जांच अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग की टीमें निर्माण इकाइयों और बाजारों से उत्पादों के नमूने लेकर जांच करेंगी। जांच में मिलावट या प्रतिबंधित सामग्री की पुष्टि होने पर उत्पाद जब्त करने से लेकर फैक्ट्री सील करने, लाइसेंस रद्द करने और एफआईआर दर्ज करने तक की कार्रवाई की जाएगी।









