
लखनऊ 17 जून । उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत करीब 1.86 लाख शिक्षक अब तक शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) उत्तीर्ण नहीं कर सके हैं। इनमें लगभग 50 हजार शिक्षक ऐसे हैं जो न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता के अभाव में टीईटी परीक्षा में शामिल होने के पात्र नहीं थे। ऐसे शिक्षकों को राहत देते हुए प्रदेश सरकार ने न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता के मानकों में छूट देने का निर्णय लिया है तथा उनके लिए विशेष टीईटी परीक्षा आयोजित करने की तैयारी शुरू कर दी है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में बेसिक शिक्षा विभाग ने कार्यरत शिक्षकों के टीईटी एवं सीटीईटी संबंधी विवरण जुटाने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। विशेष सचिव बेसिक शिक्षा अवदेश कुमार तिवारी ने शिक्षा निदेशक (बेसिक) को इस संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए हैं। जारी निर्देशों के अनुसार, उच्चतम न्यायालय ने पुनर्विचार याचिका संख्या 53434/2025, उत्तर प्रदेश राज्य बनाम अंजुमन इशात-ए-तालीम ट्रस्ट मामले में 29 मई 2026 को पारित आदेश के तहत इन-सर्विस शिक्षकों के लिए टीईटी योग्यता प्राप्त करने की समय-सीमा 31 अगस्त 2027 से बढ़ाकर 31 अगस्त 2028 कर दी है। न्यायालय ने यह भी अपेक्षा जताई है कि राज्यों में टीईटी परीक्षा नियमित रूप से और अधिमानतः वर्ष में दो बार आयोजित की जाए, ताकि पात्र शिक्षकों को आवश्यक योग्यता प्राप्त करने का पर्याप्त अवसर मिल सके। शासनादेश में उल्लेख किया गया है कि उच्चतम न्यायालय ने अपने पूर्व आदेश में संशोधन करते हुए समय-सीमा में एक वर्ष का विस्तार प्रदान किया है तथा इस संबंध में दायर सभी पुनर्विचार याचिकाओं का निस्तारण कर दिया है। इसके साथ ही शासन स्तर पर कार्यरत शिक्षकों के लिए विशेष टीईटी परीक्षा आयोजित करने की संभावना पर भी विचार किया जा रहा है। इस उद्देश्य से शिक्षा निदेशक (बेसिक) को निर्देशित किया गया है कि उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद के अधीन संचालित विद्यालयों में कार्यरत ऐसे शिक्षकों का जनपदवार विवरण एक सप्ताह के भीतर उपलब्ध कराया जाए, जिन्होंने अभी तक टीईटी अथवा सीटीईटी उत्तीर्ण नहीं किया है। शिक्षा विभाग के इस कदम से बड़ी संख्या में शिक्षकों को राहत मिलने की उम्मीद है, वहीं विशेष टीईटी परीक्षा के माध्यम से उन्हें आवश्यक योग्यता प्राप्त करने का अतिरिक्त अवसर भी मिलेगा।





















