
हाथरस 30 अप्रैल। उच्च न्यायालय, इलाहाबाद और उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के आदेशों के अनुपालन में, जनपद न्यायाधीश विनय कुमार-तृतीय की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंस कक्ष में एक उच्च स्तरीय बैठक संपन्न हुई. इस बैठक का मुख्य उद्देश्य 9 मई 2026 को आयोजित होने वाली आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत में अधिक से अधिक लंबित मुकदमों का निस्तारण सुनिश्चित करना था. बैठक के दौरान जनपद न्यायाधीश ने सभी प्रशासनिक अधिकारियों से लोक अदालत के लिए अब तक चिन्हित किए गए वादों, जारी किए गए सम्मन और नोटिसों की तामीला की अद्यतन स्थिति की विस्तृत समीक्षा की. उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि वे राष्ट्रीय लोक अदालत में वादों के निस्तारण की गति को बढ़ाएं ताकि इस राष्ट्रीय आयोजन को पूर्णतः सफल बनाया जा सके.
जनपद न्यायाधीश ने विशेष रूप से उन मुकदमों पर ध्यान केंद्रित करने को कहा जो वर्षों से लंबित हैं. उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि ऐसे पुराने वादों को चिन्हित करें जिन्हें आपसी सुलह-समझौते के माध्यम से हल किया जा सकता है और संबंधित पक्षकारों को इसके लिए निरंतर प्रेरित करें. उन्होंने जोर देकर कहा कि सुलह-समझौता ही कानूनी विवादों को खत्म करने का सबसे प्रभावी जरिया है और इसके लिए हर संभव प्रयास किए जाने चाहिए. बैठक में न्यायिक और प्रशासनिक तालमेल पर बल दिया गया ताकि आम जनता को त्वरित न्याय मिल सके.
इस महत्वपूर्ण रणनीतिक बैठक में जनपद के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जिनमें प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय बाबूराम, जिलाधिकारी अतुल वत्स और पुलिस अधीक्षक चिरंजीव नाथ सिन्हा प्रमुख थे. इनके अलावा विशेष न्यायाधीश (पोक्सो अधिनियम) निर्भय नारायण राय, अपर जनपद न्यायाधीश विजय कुमार, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सूरज मिश्रा, न्यायिक मजिस्ट्रेट खुशबू चन्द्रा और जेलर देव दर्शन सिंह ने भी बैठक में भाग लिया और लोक अदालत की तैयारियों पर अपने विचार साझा किए.





















