Hamara Hathras

Latest News

मथुरा 19 मार्च । केडी विश्वविद्यालय के चिकित्सा शिक्षा संस्थान केडी मेडिकल कॉलेज-हॉस्पिटल एण्ड रिसर्च सेण्टर में गुरुवार को आयोजित ओरिएंटेशन प्रोग्राम में स्नातकोत्तर (पीजी-2025) छात्र-छात्राओं को समय की महत्ता, नैतिकता और टीम वर्क को सर्वोपरि मानते हुए एक कुशल चिकित्सक बनने की सलाह दी गई। ओरिएंटेशन प्रोग्राम का शुभारम्भ डीन और प्राचार्य डॉ. आर.के. अशोका, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. गगनदीप सिंह, चिकित्सा उप-अधीक्षक और प्रतिकुलपति डॉ. गौरव सिंह, विभागाध्यक्ष महिला एवं प्रसूति रोग डॉ. वीपी पांडेय, विभागाध्यक्ष मेडिसिन डॉ. मंजू पांडेय, विभागाध्यक्ष पैथोलॉजी डॉ. प्रणीता सिंह, विभागाध्यक्ष हड्डी रोग डॉ. विक्रम शर्मा, विभागाध्यक्ष सामुदायिक चिकित्सा डॉ. अमनजोत सिंह चौहान आदि ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलित कर किया। केडी विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. रामकिशोर अग्रवाल, प्रति-कुलाधिपति श्री मनोज अग्रवाल ने अपने संदेश में विभिन्न विभागों के नवागंतुक स्नातकोत्तर छात्र-छात्राओं को बधाई देते हुए कहा कि बुद्धिमत्ता, कौशल और शैक्षणिक सफलता वास्तव में एक अच्छे डॉक्टर बनने के लिए आवश्यक तत्व हैं। सभी चिकित्सकों को नए शोधों और खोजों से अवगत रहना चाहिए तथा नियमित रूप से नए ज्ञान को लागू करने में सक्षम होना चाहिए।

डीन और प्राचार्य डॉ. आर.के. अशोका ने नवागंतुक स्नातकोत्तर छात्र-छात्राओं का अभिनंदन करते हुए उन्हें केडी मेडिकल कॉलेज की एक दशक की उपलब्धियों की विस्तार से जानकारी दी। डॉ. अशोका ने कहा कि केडी विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. रामकिशोर अग्रवाल, प्रति-कुलाधिपति श्री मनोज अग्रवाल का मुख्य उद्देश्य आधुनिकतम सुविधाओं के बीच युवा पीढ़ी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। डॉ. अशोका ने केडी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. मनेष लाहौरी, मुख्य कार्यकारी अधिकारी अरुण अग्रवाल, कुलसचिव डॉ. विकास कुमार अग्रवाल तथा उप महाप्रबंधक मनोज गुप्ता के कार्यशैली की मुक्तकंठ से सराहना की। डॉ. अशोका ने पीजी छात्र-छात्राओं से मरीजों की सेवा को सर्वोपरि रखने, अस्पताल की कार्यप्रणाली, नियमों और शैक्षणिक गतिविधियों को समझने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि सहानुभूति चिकित्सकों के लिए आवश्यक कौशलों में से एक है। मरीज और उनके परिजन अक्सर कठिन और तनावपूर्ण परिस्थितियों में होते हैं, ऐसे में चिकित्सकों को मरीज की इस तरह से देखभाल करनी चाहिए जोकि उसके शारीरिक और भावनात्मक दोनों आवश्यकताओं को पूरा करे।

चिकित्सा अधीक्षक डॉ. गगनदीप सिंह ने छात्र-छात्राओं से अनुशासित रहने, टीम वर्क के साथ काम करने, नैतिकता बनाए रखने तथा पाठ्यक्रम के दौरान नई तकनीकों व कौशल को सीखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सभी डॉक्टरों में चिकित्सा क्षमता और ज्ञान होता है, लेकिन कुछ विशिष्ट कौशल और गुण एक चिकित्सक को दूसरे से अलग बना सकते हैं। यहां तक कि यह भी निर्धारित कर सकते हैं कि कोई डॉक्टर अच्छा है या दूसरों से बेहतर है। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सिंह ने कहा कि चिकित्सा जगत के सहकर्मी किसी डॉक्टर की बुद्धिमत्ता और ईमानदारी, दूसरों की मदद करने की क्षमता और व्यक्तिगत नैतिक आचरण को महत्व देते हैं, लेकिन मरीज अक्सर डॉक्टर के संवाद कौशल और व्यवहार पर अधिक ध्यान देते हैं, लिहाजा एक अच्छे डॉक्टर बनने के लिए आवश्यक कौशलों पर विचार करते समय, चिकित्सा सम्बन्धी योग्यता और ज्ञान के महत्वपूर्ण केन्द्र का विस्तार करना आवश्यक है।

डॉ. वीपी पांडेय, डॉ. अमित कुमार जैन, डॉ. मंजू पांडेय, डॉ. प्रणीता सिंह, डॉ. जयेश, डॉ. संध्या लता, डॉ. नाजिया हामिद आदि ने पीजी स्नातकोत्तर छात्र-छात्राओं को अपने-अपने विभागों की जानकारी देते हुए प्रशिक्षण के दौरान सक्रिय रूप से मरीजों के प्रबंधन, नैदानिक प्रक्रियाओं और अकादमिक गतिविधियों (सेमिनार, जर्नल क्लब, केस प्रस्तुति) में भाग लेने के साथ  वार्ड राउंड में सक्रियता, मरीजों की फाइलें लिखने, सीनियर डॉक्टरों से सीखने और अनुसंधान कार्य पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी। अंत में ओरिएंटेशन प्रोग्राम की समन्वयक विभागाध्यक्ष सामुदायिक चिकित्सा डॉ. अमनजोत सिंह चौहान ने सभी का आभार माना।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Posts

You cannot copy content of this page