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मथुरा 07 मार्च । राजीव इंटरनेशनल स्कूल की कक्षा दो की मेधावी छात्रा आश्विका किशोर ने इंटरनेशनल कम्प्यूटर ओलम्पियाड में 99.78 प्रतिशत अंकों के साथ पहली रैंक हासिल कर समूचे ब्रज मण्डल को गौरवान्वित किया है। होनहार आश्विका किशोर को इस शानदार सफलता पर स्वर्ण पदक के साथ प्रशस्ति पत्र और रुपये 1000 का गिफ्ट वाउचर प्रदान कर सम्मानित किया गया। प्राचार्या प्रिया मदान ने बताया कि राजीव इंटरनेशनल स्कूल के छात्र-छात्राएं लगातार हर क्षेत्र में सफलताएं हासिल कर रहे हैं। हाल ही में आरआईएस की मेधावी छात्रा आश्विका किशोर ने इंटरनेशनल कम्प्यूटर ओलम्पियाड में पहली रैंक हासिल कर इस बात को सही साबित किया कि सफलता उम्र की मोहताज नहीं होती। उन्होंने आश्विका किशोर की बौद्धिक क्षमता को सराहते हुए कहा कि इस बेटी ने रीजनल स्तर पर भी प्रथम स्थान प्राप्त किया था। प्राचार्या प्रिया मदान ने बताया कि आश्विका किशोर को शानदार सफलता के लिए आयोजकों की तरफ से सर्टिफिकेट, मेडल और कैश प्राइज प्रदान कर प्रोत्साहित किया गया।

प्राचार्या प्रिया मदान ने कहा कि विद्यार्थी जीवन में सफलता के लिए विशेष प्रयत्न करने पड़ते हैं और जो रुकते नहीं वही आगे बढ़ते हैं। उन्होंने कहा कि विद्या सभी बंधनों से दूर ले जाती है। जिस प्रकार दीप जलाने से अंधेरा दूर होता है, उसी तरह ज्ञान के प्रकाश से दुनिया रोशन होती है। मेधावी छात्रा आश्विका किशोर ने अपनी प्रतिभा से सिर्फ ब्रज क्षेत्र ही नहीं समूचे प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। स्कूल के चेयरमैन मनोज अग्रवाल ने छात्रा आश्विका किशोर की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। श्री अग्रवाल ने कहा कि शिक्षा ही एक ऐसा क्षेत्र है जहां हर समस्या का समाधान है। राजीव इंटरनेशनल स्कूल प्रत्येक बच्चे को जल्दी और प्रभावी ढंग से सीखने, कल्पना करने, ध्यान केन्द्रित करने के लिए लगातार प्रशिक्षित करता है ताकि वह अपने मस्तिष्क को पहले से कहीं अधिक प्रभावी ढंग से उपयोग में ला सकें।

चेयरमैन श्री अग्रवाल ने कहा कि दृढ़ संकल्प, अनुशासन और निरंतर प्रयास ही सफलता का मूलमंत्र है। आश्विका किशोर की यह सफलता उसकी लगन और मेहनत का सुफल है, इसके लिए उसके माता-पिता भी बधाई के पात्र हैं। श्री अग्रवाल ने कहा कि होनहार छात्रा की इस सफलता से समूचा विद्यालय परिवार खुश है। उन्होंने कहा कि ऐसे बच्चों का सम्मान होना चाहिए जो पढ़ाई के साथ ही अन्य गतिविधियों में हिस्सा लेकर अपने विद्यालय और शहर का गौरव बढ़ाते हैं। श्री अग्रवाल ने कहा कि प्रशंसा और सकारात्मक प्रतिक्रिया भौतिक पुरस्कारों से कहीं अधिक प्रभावी प्रेरक हो सकते हैं क्योंकि इनसे बच्चों में अपनी क्षमताओं के प्रति आत्मविश्वास बढ़ता है।

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