
हाथरस 03 अगस्त। विकसित भारत-रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) ‘वी.बी.जी. राम जी अधिनियम-2025’ को लेकर कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी अतुल वत्स की अध्यक्षता में पंच सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन की थीम ‘ग्राम पंचायत का नेतृत्व, जनभागीदारी का संकल्प, विकसित भारत का निर्माण’ रही। कार्यक्रम का शुभारंभ भाजपा जिलाध्यक्ष प्रेम सिंह कुशवाह, राष्ट्रीय लोकदल जिलाध्यक्ष श्याम सिंह, अपना दल जिलाध्यक्ष रवि सारस्वत, जिलाधिकारी अतुल वत्स एवं मुख्य विकास अधिकारी पीएन दीक्षित ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। सम्मेलन में भाजपा जिलाध्यक्ष प्रेम सिंह कुशवाह, राष्ट्रीय लोकदल जिलाध्यक्ष श्याम सिंह तथा अपना दल जिलाध्यक्ष रवि सारस्वत ने कहा कि केंद्र एवं प्रदेश सरकार ने पूर्ववर्ती मनरेगा योजना की कमियों को दूर करते हुए नई व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और जनहितैषी स्वरूप देने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा प्रत्येक विकास कार्य को पारदर्शिता के साथ धरातल पर उतारने की है। वीबीजी राम जी अधिनियम लागू होने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को नई गति मिलेगी और वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को साकार करने में योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था में श्रमिकों के कार्य और भुगतान की प्रक्रिया में भी पारदर्शिता सुनिश्चित की गई है। जिलाध्यक्षों ने कहा कि योजना का नाम मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के नाम पर रखा गया है और इसके तहत कराए जाने वाले कार्यों का दायरा पहले की तुलना में विस्तृत किया गया है। अब ग्राम पंचायतों में विद्यालयों सहित अन्य सार्वजनिक उपयोग से जुड़े विकास कार्यों और ग्रामीण आधारभूत सुविधाओं के निर्माण को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे गांवों के समग्र विकास को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। जनप्रतिनिधियों ने सुझाव दिया कि विकास कार्यों के क्रियान्वयन में ग्राम पंचायतों को अधिक अधिकार और स्वायत्तता दी जानी चाहिए। यदि कोई ग्राम पंचायत निर्धारित अनुपात में कच्चे कार्य पूरे कर चुकी है तो उसे पक्के विकास कार्यों के लिए अनावश्यक अनुमति प्रक्रिया से न गुजरना पड़े। इससे विकास कार्यों में तेजी आएगी और ग्राम पंचायतों की सहभागिता बढ़ेगी। उन्होंने मजदूरी भुगतान में देरी होने पर विलंब अवधि के लिए ब्याज दिए जाने के प्रावधान की भी सराहना की और कहा कि इससे श्रमिकों के हितों की रक्षा होगी। कार्यशाला को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी अतुल वत्स ने कहा कि नई योजना का उद्देश्य केवल ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि विकास कार्यों में पारदर्शिता, गुणवत्ता और जनसहभागिता सुनिश्चित करना भी है। उन्होंने कहा कि योजना के अंतर्गत कार्यों का दायरा बढ़ाया गया है, जिससे ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों को गति मिलेगी। जिलाधिकारी ने स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप कार्यों को प्राथमिकता देने पर जोर देते हुए कहा कि जहां जरूरत हो, वहां मिट्टी के संपर्क मार्गों का निर्माण एवं अनुरक्षण भी कराया जाना चाहिए, क्योंकि कई ग्रामीण क्षेत्रों में यही रास्ते लोगों की वास्तविक जरूरतों को पूरा करते हैं। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि योजना को किसी भी प्रकार से अनियमितता या कमीशनखोरी का माध्यम न बनने दिया जाए। श्रमिकों का पूरा पारिश्रमिक समय से उनके बैंक खातों में पहुंचे और किसी भी स्तर पर अवैध धन की मांग या भ्रष्टाचार की शिकायत नहीं मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि कहीं से भी इस प्रकार की शिकायत प्राप्त होती है तो संबंधित अधिकारी और कर्मचारी की जवाबदेही तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार श्रमिकों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। इसलिए अधिकारियों और कर्मचारियों को भी नई व्यवस्था के अनुरूप अपनी कार्यप्रणाली विकसित करनी होगी। जिलाधिकारी ने योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए व्यापक प्रशिक्षण पर विशेष जोर देते हुए कहा कि सभी खंड विकास अधिकारियों, ग्राम विकास अधिकारियों, रोजगार सेवकों और संबंधित कर्मचारियों को योजना के प्रत्येक प्रावधान की पूरी जानकारी होनी चाहिए, ताकि वे जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों के सवालों का सही एवं स्पष्ट जवाब दे सकें।
जिलाधिकारी ने सुझाव दिया कि योजना के तहत कराए जा सकने वाले सभी कार्यों की सूची प्रत्येक ग्राम पंचायत भवन पर वॉल पेंटिंग के माध्यम से प्रदर्शित की जाए। इसके साथ ही ग्राम पंचायतों की स्वीकृत कार्ययोजनाओं को भी सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शित किया जाए, ताकि ग्रामीणों को योजना की जानकारी मिल सके और विकास कार्यों में पारदर्शिता एवं जनभागीदारी सुनिश्चित हो। सम्मेलन में मुख्य विकास अधिकारी एवं परियोजना निदेशक ने वीबीजी राम जी अधिनियम-2025 की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि अधिनियम ग्रामीण परिवारों के लिए रोजगार एवं आजीविका की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि नई व्यवस्था में ग्रामीण परिवारों को 100 दिनों के स्थान पर 125 दिनों के रोजगार की गारंटी प्रदान की जाएगी। यदि कार्य की मांग करने के बावजूद पात्र व्यक्ति को रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जाता है तो उसे बेरोजगारी भत्ता दिए जाने का प्रावधान है। उन्होंने बताया कि मजदूरी भुगतान में देरी होने पर प्रत्येक विलंबित दिवस के लिए मुआवजा भी मजदूरी के साथ दिए जाने का प्रावधान है। ग्राम स्तर पर योजनाओं के निर्माण में ग्राम सभा की प्रमुख भूमिका होगी और ग्राम पंचायतें अपनी विकसित ग्राम पंचायत योजना तैयार करेंगी, जिसमें ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि अधिनियम के अंतर्गत कार्यों को चार प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया गया है। इनमें जल संरक्षण एवं संवर्धन, ग्रामीण अवसंरचना विकास, आजीविका संवर्धन तथा जलवायु परिवर्तन एवं प्रतिकूल मौसम से निपटने संबंधी कार्य शामिल हैं। इन कार्यों के माध्यम से ग्रामीण विकास, सशक्तीकरण और स्थायी आजीविका को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखा गया है। अधिनियम के तहत ग्राम स्तर पर संचालित विभिन्न विकास कार्यों को एकीकृत डिजिटल प्रणाली से जोड़ने की व्यवस्था की जाएगी। इससे विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा, कार्यों की पुनरावृत्ति पर रोक लगेगी तथा पारदर्शिता एवं जवाबदेही बढ़ेगी। मुख्य विकास अधिकारी ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा बुवाई और कटाई के प्रमुख कृषि कार्यों को ध्यान में रखते हुए 60 दिनों की अवधि निर्धारित करने का प्रावधान किया गया है। इस अवधि में अधिनियम के तहत कार्य संचालित नहीं किए जाएंगे, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि कार्य निर्बाध रूप से हो सकें।
उन्होंने आमजन से अपील की कि अधिनियम से संबंधित जानकारी केवल अधिकृत सरकारी स्रोतों से ही प्राप्त करें और आवश्यकता होने पर ग्राम पंचायत कार्यालय से संपर्क करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान में मनरेगा के अंतर्गत संचालित सभी कार्य सुरक्षित हैं और किसी भी कार्य पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। अधिनियम पूरी तरह लागू होने के बाद नए प्रावधानों के अनुरूप नए कार्य शुरू किए जाएंगे। अधिनियम लागू होने पर ग्रामीणों को 125 दिनों के रोजगार के साथ संशोधित एवं बढ़ी हुई मजदूरी दरों का लाभ भी प्राप्त होगा। सम्मेलन में पंजीकरण, आवेदन, कार्यान्वयन, पारदर्शिता, सामाजिक अंकेक्षण, सार्वजनिक प्रकटीकरण, रिपोर्टिंग एवं अभिलेखों के रख-रखाव से संबंधित प्रक्रियाओं की भी जानकारी दी गई। कार्यक्रम में प्रभागीय वनाधिकारी, जिला विकास अधिकारी, उप निदेशक कृषि, जिला पंचायत राज अधिकारी, सहायक अभियंता लघु सिंचाई, लोक निर्माण विभाग के अधिकारी, खंड विकास अधिकारी, सहायक खंड विकास अधिकारी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।











