
हाथरस 14 जुलाई। जिले में इस वर्ष मक्का की बंपर पैदावार किसानों के लिए परेशानी का कारण बन गई है। सरकारी खरीद केंद्रों का लक्ष्य पूरा होने के बाद अधिकांश केंद्र बंद कर दिए गए हैं। ऐसे में किसान अपनी उपज लेकर मंडियों का रुख कर रहे हैं, जहां उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से 350 से 800 रुपये प्रति क्विंटल तक कम दाम पर मक्का बेचने की मजबूरी झेलनी पड़ रही है। प्रदेश सरकार ने इस वर्ष मक्का का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2400 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है, जबकि जिले की मंडियों में मक्का 1600 से 2051 रुपये प्रति क्विंटल के बीच बिक रहा है। इससे किसानों को प्रति क्विंटल भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। खाद्य एवं विपणन विभाग के अनुसार, जिले में मक्का खरीद का लक्ष्य 8500 क्विंटल निर्धारित किया गया था। अब तक 6667 क्विंटल मक्का की सरकारी खरीद हो चुकी है। लक्ष्य पूरा होने के बाद सात में से पांच खरीद केंद्र बंद कर दिए गए हैं। वर्तमान में केवल सासनी और सादाबाद के केंद्रों पर खरीद जारी है, जहां क्रमशः 600 और 700 क्विंटल का लक्ष्य शेष है। कृषि विभाग के अनुसार, इस वर्ष जिले में लगभग 17 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में मक्का की खेती की गई, जिससे उत्पादन भी रिकॉर्ड स्तर पर हुआ है। पिछले वर्ष 11 जुलाई तक मंडी में केवल 1.35 हजार क्विंटल मक्का पहुंचा था, जबकि इस वर्ष इसी अवधि तक यह आंकड़ा बढ़कर 3.25 हजार क्विंटल हो गया है। वर्तमान में जिले की मंडियों में प्रतिदिन करीब 7 हजार क्विंटल मक्का बिक्री के लिए पहुंच रहा है, जो अब तक हुई कुल सरकारी खरीद से भी अधिक है। किसानों का कहना है कि खरीद केंद्रों पर लक्ष्य पूरा होने का हवाला देकर मक्का नहीं खरीदा जा रहा है। मजबूरी में उन्हें खुले बाजार में कम कीमत पर अपनी उपज बेचनी पड़ रही है। एक किसान ने बताया कि वह तीन-चार दिन तक अलीगढ़ रोड स्थित मक्का खरीद केंद्र के चक्कर लगाता रहा, लेकिन हर बार लक्ष्य पूरा होने की बात कहकर वापस कर दिया गया। अंततः उसे अपनी मक्का 2051 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से मंडी में बेचनी पड़ी, जिससे उसे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। किसानों ने शासन से मांग की है कि मक्का खरीद केंद्रों का संचालन जारी रखा जाए और सभी किसानों की उपज न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी जाए, ताकि उन्हें उचित मूल्य मिल सके।











