
हाथरस 18 सितम्बर। विश्वविख्यात हास्य-व्यंग्य कवि काका हाथरसी जी की पुण्यतिथि पर मुरसान गेट स्थित संगीत कार्यालय में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में कार्यालय के प्रबंधक शरण गोपाल ने काका हाथरसी के छायाचित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उनकी चर्चित रचना “लब का मतलब समझिए, लब के लाख प्रकार, बेमतलब मत लव करो, मतलब का संसार” का पाठ किया। उन्होंने कहा कि हास्य रस को मंचों पर उचित स्थान दिलाने वाले हास्य महर्षि काका हाथरसी ने कभी निराशा को अपने पास नहीं फटकने दिया। वह सदैव प्रसन्नचित्त रहकर अपनी रचनाओं के माध्यम से लोगों को हंसी का टॉनिक देते रहे। पुष्पांजलि अर्पित करते हुए लक्ष्मण सिंह ने कहा कि हंसी की चाशनी में पगी काका जी की व्यंग्य रचनाएं और उन्हें प्रस्तुत करने का उनका अंदाज लोगों को खूब पसंद आता था। उन्होंने कहा कि काका हाथरसी द्वारा स्थापित संगीत विषयक पुस्तकों का यह प्रतिष्ठान आज लाखों विद्यार्थियों, अध्यापकों एवं शोधार्थियों के लिए मार्गदर्शक की भूमिका निभा रहा है। काका जी ने हास्य रस के माध्यम से लोगों को खुश रहना सिखाने के साथ संगीत और साहित्य के माध्यम से शिक्षा का प्रकाश भी फैलाया। सुधीर कुमार ने कहा कि काका हाथरसी एक बेहतरीन चित्रकार भी थे और उनके द्वारा बनाए गए संगीतकारों के चित्र आज भी कार्यालय की शोभा बढ़ा रहे हैं। इस अवसर पर मनीष कुमार एवं नितेन्द्र कुमार ने भी पुष्पांजलि अर्पित कर काका हाथरसी को नमन किया।








