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सासनी 13 सितम्बर। भारत की राजभाषा हिंदी को प्रचार-प्रसार के माध्यम से अन्य भाषाओं के मुकाबले गौरवपूर्ण स्थान दिलाने के लिए संकल्पित गढ़ी तमना निवासी एवं संस्कृत में पीएचडी प्राप्त डॉ. मीनू शर्मा ने 14 सितंबर को मनाए जाने वाले हिंदी दिवस पर हर्ष व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार से हिंदी को राष्ट्रभाषा घोषित किए जाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और भावनाओं की आत्मा है। डॉ. मीनू शर्मा ने कहा कि हिंदी देशवासियों को एक सूत्र में पिरोने का कार्य करती है और विभिन्न क्षेत्रों, धर्मों एवं संस्कृतियों के लोगों को आपस में जोड़ती है। दुनिया के करोड़ों लोग हिंदी बोलने के साथ-साथ इसे समझते भी हैं, जिसके चलते हिंदी विश्व की प्रमुख भाषाओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि इसी महत्व को देखते हुए संविधान सभा ने 14 सितंबर 1949 को हिंदी को भारत की राजभाषा का दर्जा दिया था। हिंदी दिवस इसी ऐतिहासिक निर्णय की स्मृति में मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि हिंदी को केवल बोलचाल की भाषा तक सीमित न रखकर शिक्षा, प्रशासन, साहित्य, विज्ञान, तकनीक और दैनिक जीवन में इसके अधिकाधिक प्रयोग को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। हिंदी के व्यापक प्रचार-प्रसार से आने वाली पीढ़ियों को अपनी भाषा, संस्कृति और विरासत से जोड़ने में भी मदद मिलेगी। इस अवसर पर डॉ. मीनू शर्मा ने हिंदी प्रेमियों, साहित्यकारों एवं कविगणों से आह्वान किया कि इस हिंदी दिवस पर सभी संकल्प लें कि वे हिंदी का अधिक से अधिक प्रयोग करेंगे और इसे केवल एक भाषा नहीं, बल्कि अपनी आत्मा, संस्कृति एवं अस्मिता का प्रतीक मानते हुए सम्मान प्रदान करेंगे। उन्होंने कहा कि हिंदी के प्रति सम्मान और उसके प्रयोग को बढ़ावा देना प्रत्येक भारतीय की जिम्मेदारी है।

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