
हाथरस 01 सितम्बर। साहित्यकार एवं प्रख्यात कुण्डलियाकार त्रिलोक सिंह ठकुरेला की साहित्यिक उपलब्धियों में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया है। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड, धर्मशाला द्वारा नई शिक्षा नीति के आधार पर कक्षा-4 के विद्यार्थियों के लिए प्रकाशित हिंदी पाठ्यपुस्तक ‘वीणा-II’ में उनकी प्रार्थना ‘ऐसा वर दो’ को शामिल किया गया है। त्रिलोक सिंह ठकुरेला चर्चित बाल साहित्यकार होने के साथ-साथ प्रख्यात कुण्डलियाकार के रूप में भी अपनी विशिष्ट पहचान रखते हैं। उनकी रचनाओं को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 एवं राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा-2023 के अनुरूप तैयार की गई विभिन्न पाठ्यपुस्तकों में स्थान मिला है। उनकी रचनाएँ राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) के अलावा महाराष्ट्र, केरल, उत्तराखंड, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश सरकार की विभिन्न कक्षाओं की हिंदी पाठ्यपुस्तकों में सम्मिलित की जा चुकी हैं। इसके अतिरिक्त ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस तथा एक्सीड एजूकेशन, सिंगापुर सहित शताधिक पाठ्यपुस्तकों में भी उनकी रचनाओं को स्थान मिला है।
हाथरस की मिट्टी से राष्ट्रीय पहचान तक
त्रिलोक सिंह ठकुरेला का जन्म हाथरस जिले की सासनी तहसील के गांव नगला मिश्रिया में पिता श्री खमानी सिंह एवं माता श्रीमती देवी के घर हुआ। साहित्य के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय ठकुरेला ने विशेष रूप से बाल साहित्य को समृद्ध करने में उल्लेखनीय योगदान दिया है। उनकी रचनाएँ विविध विधाओं के अनेक साहित्यिक संकलनों में प्रकाशित हो चुकी हैं। राजस्थान साहित्य अकादमी एवं पंडित जवाहरलाल नेहरू बाल साहित्य अकादमी सहित विभिन्न साहित्यिक संस्थाओं द्वारा उन्हें पुरस्कृत एवं सम्मानित किया जा चुका है। बाल साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उन्होंने विभिन्न भारतीय भाषाओं से अनूदित बाल कहानी संकलनों के साथ-साथ लगभग एक दर्जन बाल कहानी संकलनों का संपादन भी किया है।
चर्चित कृतियाँ
त्रिलोक सिंह ठकुरेला की चर्चित काव्य कृतियों में ‘नया सवेरा’, ‘काव्यगंधा’, ‘समय की पगडण्डियों पर’, ‘आनन्द मंजरी’ और ‘सात रंग के घोड़े’ प्रमुख हैं। हिमाचल प्रदेश की कक्षा-4 की हिंदी पाठ्यपुस्तक में उनकी प्रार्थना ‘ऐसा वर दो’ का शामिल होना न केवल साहित्यकार त्रिलोक सिंह ठकुरेला के लिए गौरव का विषय है, बल्कि हाथरस जिले के लिए भी साहित्यिक उपलब्धि और सम्मान की बात है।












